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श्रीलंका में सीधा हस्तक्षेप नहीं-प्रणव | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
विदेश मंत्री प्रणव मुखर्जी ने कहा है कि श्रीलंका में जातीय समस्या से निपटने के लिए भारत का सीधा हस्तक्षेप करने का कोई इरादा नहीं है. उन्होंने तमिल विद्रोही संगठन एलटीटीई के तमिल ईलम (तमिलों के लिए अलग देश) बनाने की परिकल्पना को खारिज करते हुए कहा कि इस समस्या का हल श्रीलंका के भीतर ही निकाला जाना चाहिए. उन्होंने कहा कि जातीय समस्या का हल श्रीलंका के संविधान के तहत ही किया जाना चाहिए लेकिन तमिलों की वैधानिक इच्छाओं को ध्यान में रखना चाहिए. श्रीलंका के तमिल सासंदों की प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से हुई मुलाक़ात के बाद प्रणव मुखर्जी का यह बयान आया है. इन सांसदों ने प्रधानमंत्री को तमिलों की दयनीय स्थिति के बारे में जानकारी दी थी. भारत के विदेश मंत्री ने एलटीटीई और श्रीलंका सरकार के बीच बातचीत शुरु करवाने के नॉर्वे के प्रयासों की सराहना की और उम्मीद की कि यह बातचीत सफल होगी. उन्होंने कहा कि भारत ने निर्णय लिया है कि वह श्रीलंका को विस्फोटक नहीं भेजेगा. श्रीलंकाई सेना को भारत में प्रशिक्षण दिए जाने के बारे में प्रणव मुखर्जी ने कहा कि यह एक निरंतर चल रही प्रक्रिया है और ऐसा लंबे समय से हो रहा है. उन्होंने साफ़ किया कि भारत की ओर से श्रीलंकाई सेना को सिर्फ़ प्रशिक्षण दिया जा रहा है, कोई हथियार नहीं दिए जा रहे हैं. | इससे जुड़ी ख़बरें श्रीलंका की स्थिति से संयुक्त राष्ट्र चिंतित12 दिसंबर, 2006 | भारत और पड़ोस संघर्ष के कारण हज़ारों ने पलायन किया10 दिसंबर, 2006 | भारत और पड़ोस श्रीलंका के राष्ट्रपति भारत के दौरे पर24 नवंबर, 2006 | भारत और पड़ोस बाल सैनिकों की भर्ती का आरोप13 नवंबर, 2006 | भारत और पड़ोस श्रीलंका की स्थिति पर चिंतित हैं अन्नान11 नवंबर, 2006 | भारत और पड़ोस श्रीलंका सेना-एलटीटीई के बीच संघर्ष जारी10 नवंबर, 2006 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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