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श्रीलंका की स्थिति से संयुक्त राष्ट्र चिंतित | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
श्रीलंका में सेना और तमिल विद्रोहियों के बीच संघर्ष के दौरान रिहायशी इलाक़ों में गोलीबारी होने पर संयुक्त राष्ट्र ने चिंता जताई है. श्रीलंका के पूर्वी ज़िले बट्टिकलोआ में सेना और तमिल विद्रोहियों यानी एलटीटीई के बीच अक़्सर झड़पें होती रहती हैं और इस इलाक़े की 30 हज़ार आबादी गोलीबारी की चपेट में फंसी हुई हैं. दोनों पक्षों के बीच झड़पें तेज़ होने के बावजूद किसी ने भी वर्ष 2002 में हुए संघर्ष विराम समझौते को नहीं नकारा है. श्रीलंकाई वायुसेना ने मंगलवार सुबह भी बट्टिकलोआ ज़िले के कुछ इलाक़ों पर बमबारी की. हमले बंद हो संयुक्त राष्ट्र के स्थानीय प्रतिनिधि अमीन अवाद का कहना है, "संयुक्त राष्ट्र रिहायशी इलाक़ों पर गोलीबारी और बमबारी होने से काफी चिंतित है जिससे लोग मारे जा रहे हैं और घायल हो रहे हैं." उन्होंने कहा," वकारई और त्रिंकोमली ज़िले में सभी मूल अधिकारों का हनन हो रहा है. अभी सबसे बड़ी ज़रूरत संकट में फंसे लोगों की सुरक्षा है." अमीन अवाद ने रिहायशी इलाक़ों में हमले तुरत रोकने की ज़रूरत बताई. उन्होंने कहा कि आम लोगों को बेहिचक इधर उधर जाने की आजादी मिलनी चाहिए. सेना और विद्रोहियों के बीच सोमवार को भी संघर्ष हुआ. अंतरराष्ट्रीय रेड क्रॉस का कहना है कि उसने 30 घायल नागरिकों को सुरक्षित बाहर निकाला है. इस बीच सेना का कहना है कि वह तमिल विद्रोहियों के ख़िलाफ़ अभियान जारी रखे हुए है. दोनों पक्ष एक दूसरे को भारी क्षति पहुँचाने का दावा कर रहे हैं लेकिन संवाददाताओं का कहना है कि इन दावों की निष्पक्ष जाँच मुमकिन नहीं है. | इससे जुड़ी ख़बरें संघर्ष के कारण हज़ारों ने पलायन किया10 दिसंबर, 2006 | भारत और पड़ोस 30 सैनिकों के मारे जाने का दावा09 दिसंबर, 2006 | भारत और पड़ोस श्रीलंका में नए आपातकाल प्रावधान 06 दिसंबर, 2006 | भारत और पड़ोस श्रीलंकाई मंत्री हमले में बाल-बाल बचे01 दिसंबर, 2006 | भारत और पड़ोस "तमिल राष्ट्र के अलावा विकल्प नहीं"27 नवंबर, 2006 | भारत और पड़ोस भारत के अहम दौरे पर पहुँचे राजपक्षे25 नवंबर, 2006 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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