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बाल सैनिकों की भर्ती का आरोप | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
संयुक्त राष्ट्र ने श्रीलंका की सेना पर आरोप लगाया है कि वह एलटीटीई से अलग हुए करुणा गुट के लिए बाल सैनिकों की भर्ती कर रही है. संयुक्त राष्ट्र का कहना है कि सेना ऐसा एलटीटीई के साथ लड़ाई के लिए कर रही है. संयुक्त राष्ट्र के एक विशेष सलाहकार एलेन रॉक ने बताया है कि उनके पास इस आरोप के सबूत हैं. कोलंबो स्थित एक बीबीसी संवाददाता का कहना है कि ऐसा पहली बार हुआ है कि संयुक्त राष्ट्र ने श्रीलंका की सेना पर ऐसे आरोप लगाए हैं. दूसरी ओर श्रीलंका की सेना ने इन आरोपों से इनकार किया है. लेकिन सरकार ने पूरी जाँच का भरोसा दिलाया है. एलटीटीई के अलग हुए गुट के प्रमुख कर्नल करुणा के एक प्रवक्ता ने भी इन आरोपों को सिरे से ख़ारिज कर दिया. उनका कहना है कि उनका गुट सिर्फ़ ऐसे बच्चों को शरण देता है, जो एलटीटीई की क़ैद से निकल भागे हैं. एक संस्था चिल्ड्रेन एंड आर्म्ड कॉन्फ़्लिक्ट के विशेष सलाहकार एलेन रॉक ने कहा है कि श्रीलंका के सैनिकों ने करुणा गुट के साथ मिलकर एलटीटीई विद्रोहियों से लड़ने के लिए ज़बरदस्ती बच्चों की भर्ती कर रहे हैं. एलन रॉक ने श्रीलंका सेना के बारे में कहा कि उनके पास इस मामले में सेना की भागीदारी के प्रत्यक्ष और परोक्ष प्रमाण हैं. श्रीलंका सेना ने संयुक्त राष्ट्र अधिकारी के इन आरोपों पर कड़ी प्रतिक्रिया ज़ाहिर की है. सेना के मुताबिक़ ये आरोप पूरी तरह झूठे औऱ गुमराह करने वाले हैं. प्रतिक्रिया करुणा गुट के एक प्रवक्ता ने बीबीसी तमिल सेवा से बात करते हुए इस बात का खंडन किया है. प्रवक्ता ने कहा, "हम इन आरोपों का खंडन करते हैं, जिनके बच्चों को एलटीटीई ज़बरदस्ती अपने साथ रखना चाहती है वो अपने बच्चों को हमारे पास भेजते हैं, उन्हें डर होता है कि एलटीटीई विद्रोही उन्हें मार देंगे इसलिए हम उन्हें सुरक्षा प्रदान करते हैं."
कोलंबो में बीबीसी संवाददाता दुमिथा लूथरा के मुताबिक़ श्रीलंका सरकार पर ये गंभीर आरोप पूरी जाँच-परख के बाद ही लगाए गए हैं. एलेन रॉक ने बताया कि गाँवों से 13-14 साल के बच्चों के अपहरण होते रहे लेकिन सुरक्षा बलों ने न ही कोई गिरफ्तारी की और न ही कोई जांच की. उन्होंने कहा कि श्रीलंका के राष्ट्रपति महिंदा राजपक्षे ने आरोपों की पूरी जांच कराने का आश्वासन दिया है. श्रीलंका में सेना और युद्धविराम पर नज़र रखने वाले अधिकारियों के मुताबिक़ देश में चल रही हिंसा में इस साल अब तक कम से कम दो हजार लोग मारे जा चुके हैं. एलटीटीई देश के उत्तरी और पूर्वी हिस्सों में एक अलग स्वतंत्र देश बनाए जाने की मांग करते हैं. उनका दावा है कि दशकों से तमिल मूल के लोग श्रीलंका की सिंहला बहुल आबादी के भेद-भाव का शिकार बन रहे हैं. | इससे जुड़ी ख़बरें श्रीलंका की स्थिति पर चिंतित हैं अन्नान11 नवंबर, 2006 | भारत और पड़ोस श्रीलंका सेना-एलटीटीई के बीच संघर्ष जारी10 नवंबर, 2006 | भारत और पड़ोस एलटीटीई समर्थक सांसद की हत्या10 नवंबर, 2006 | भारत और पड़ोस सेना और एलटीटीई के बीच भारी लड़ाई09 नवंबर, 2006 | भारत और पड़ोस 'श्रीलंकाई सेना ने 45 लोगों की हत्या की'08 नवंबर, 2006 | भारत और पड़ोस एलटीटीई के ठिकानों पर हवाई हमले02 नवंबर, 2006 | भारत और पड़ोस श्रीलंका-एलटीटीई के बीच वार्ता विफल28 अक्तूबर, 2006 | भारत और पड़ोस मुख्य राजनीतिक पार्टियों में समझौता23 अक्तूबर, 2006 | भारत और पड़ोस इंटरनेट लिंक्स बीबीसी बाहरी वेबसाइट की विषय सामग्री के लिए ज़िम्मेदार नहीं है. | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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