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शनिवार, 28 अक्तूबर, 2006 को 08:54 GMT तक के समाचार
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श्रीलंका-एलटीटीई के बीच वार्ता विफल
सैनिक
पिछले कुछ वर्षों से जारी संघर्ष में हज़ारों लोगों की मौत हो गई है.
जिनेवा में श्रीलंका सरकार और तमिल विद्रोही संगठन एलटीटीई के प्रतिनिधियों के बीच शनिवार को शुरू हुई दो दिवसीय बातचीत में दोनों पक्षों के बीच कोई सहमति नहीं बन पाई है.

दोनों पक्ष आगे की बातचीत के लिए किसी एक तारीख पर भी सहमत नहीं हो सके हैं.

बातचीत के दौरान तमिल विद्रोहियों ने कहा था कि अगर श्रीलंका सरकार उत्तरी जाफ़ना प्रायद्वीप को देश के बाक़ी हिस्सों से जोड़ने वाले रास्ते को नहीं खोलती है तो विद्रोही भविष्य में बातचीत के लिए तैयार नहीं होंगे.

श्रीलंका सरकार ने एलटीटीई की इस सशर्त बातचीत की पेशकश को अनुचित करार देते हुए इसकी निंदा की. उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि अगर इस रास्ते को खोल दिया जाता है तो विद्रोही रास्ते से गुज़रने वाले वाहनों पर हमले करेंगे और उनका शोषण भी कर सकते हैं.

हालांकि एलटीटीई का कहना था कि अगर इस रास्ते को खोल दिया जाता है तो इसका सीधा लाभ मानवीय ज़रूरतों की सामग्री की आपूर्ति में होगा.

दोनों पक्षों के बीच श्रीलंका में घोषित संघर्षविराम को और प्रभावी बनाने जैसे मुद्दों पर बातचीत हो रही थी.

ग़ौरतलब है कि पिछले आठ महीनों में यह पहली बार था जब दोनों पक्ष आमने-सामने बैठकर बातें कर रहे थे.

कम उम्मीदें

श्रीलंका की मौजूदा स्थिति को देखते हुए इस बैठक को बहुत ही महत्वपूर्ण माना जा रहा था पर किसी भी मुद्दे पर सहमति नहीं बन सकी.

दोनों पक्षों के बीच यह बातचीत नोर्वे के मध्यस्थों की मौजूदगी में हो रही थी.

मध्यस्थों ने बातचीत से पहले ही स्पष्ट कर दिया था कि इस बैठक से कुछ ज़्यादा अपेक्षा रखना उचित नहीं होगा लेकिन इतनी तो उम्मीद ज़रूर जताई जा रही थी कि दोनों पक्ष आगे फिर बातचीत करने के लिए एक तारीख़ पर सहमत हो जाएँगे.

उधर इस बातचीत के शुरू होने से कुछ घंटों पहले तमिल विद्रोहियों ने कहा था कि अगर श्रीलंका सरकार उत्तरी जाफ़ना प्रायद्वीप को देश के बाक़ी हिस्सों से जोड़ने वाले रास्ते को नहीं खोलती है तो विद्रोही भविष्य में बातचीत के लिए तैयार नहीं होंगे.

चिंता

पिछले कुछ समय में श्रीलंका को हिंसा के दौर से गुज़रना पड़ा है और हिंसा की घटनाओँ में दोनों पक्षों को काफ़ी नुकसान उठाना पड़ा है.

सरकारी आँकड़ों के मुताबिक़ इस वर्ष जुलाई से अबतक कुल 372 सुरक्षा बलों के जवान मारे जा चुके हैं. इसके अलावा 128 नागरिक और कई विद्रोही भी मारे गए हैं.

हालांकि दोनो पक्षों ने इस वर्ष फरवरी में बातचीत के बाद तय किया था कि वे संघर्षविराम का सम्मान करते हुए इसे जारी रखेंगे पर ऐसा नहीं हुआ और दोनों ओर से लगातार संघर्ष जारी है.

एक आकलन के मुताबिक़ जुलाई से अबतक आत्मघाती हमलों और सरकार और विद्रोहियों के बीच जारी संघर्ष में एक हज़ार से भी ज़्यादा लोगों की मौत हो चुकी है.

इसके अलावा लाखों की तादाद में लोग विस्थापित होने के लिए मजबूर हुए हैं.

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