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मुख्य राजनीतिक पार्टियों में समझौता | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
श्रीलंका में तमिल विद्रोहियों के प्रति समान नीति बनाने के सिलसिले में राष्ट्रपति महिंदा राजपक्षे ने वहाँ की मुख्य विपक्षी पार्टी यूएनपी के साथ एक समझौता किया है. बीबीसी संवाददाता दुमिथा लूथरा का कहना है कि ये समझौता अगले हफ़्ते जिनीवा में विद्रोहियों से होने वाली बातचीत से पहले किया गया है. श्रीलंका में दो मुख्य राजनीतिक पार्टियाँ हैं- सत्ताधारी एसएलएफ़पी यानी श्रीलंका फ़्रीडम पार्टी और विपक्षी पार्टी यूएनपी यानी यूनाइटेड नेशनल पार्टी. दोनों पार्टियों का दृष्टिकोण हमेशा अलग अलग रहा है लेकिन अब दोनों ने अहम मुदों पर मिलकर काम करने पर सहमति जताई है. श्रीलंका फ़्रीडम पार्टी अल्पमत वाली सरकार है और उसे विपक्ष की मदद की ज़रूरत है. सरकार ने दूसरी विपक्षी पार्टी जेवीपी के साथ भी बातचीत की है. जेवीपी और श्रीलंका फ़्रीडम पार्टी के बीच वैचारिक स्तर पर मतभेद हालांकि कम है लेकिन उसके साथ समझौता नहीं हो पाया. मतभेद का मुख्य मुद्दा तमिल विद्रोहियों के साथ चल रहा संघर्ष है. वहीं मुख्य विपक्षी पार्टी यूएनपी पूर्व में विद्रोहियों के साथ बातचीत के पक्ष में रही है. तमिल विद्रोही पिछले दो दशकों से स्वतंत्र राष्ट्र के लिए लड़ रहे हैं. सेना और पर्यवेक्षकों का कहना है कि इस वर्ष हिंसा में करीब दो हज़ार लोग मारे जा चुके हैं जिसमें सैनिक, विद्रोही और तमिल, सिंहला और मुस्लिम नागरिक शामिल हैं. श्रीलंका सरकार और तमिल विद्रोही इस महीने के अंत में स्विट्ज़रलैंड में बातचीत करने पर सहमति जता चुके हैं. तमिल विद्रोही 28 और 29 अक्टूबर को बातचीत के लिए तैयार हुए हैं. सन् 2002 में सरकार और एलटीटीई के बीच हुए संघर्षविराम हुआ था. लेकिन दोनों पक्षों के बीच संघर्ष की घटनाएँ इस साल काफ़ी बढ़ी हैं. | इससे जुड़ी ख़बरें '20 तमिल विद्रोहियों' को मारने का दावा20 अक्तूबर, 2006 | भारत और पड़ोस उत्तर में सेना और विद्रोहियों में लड़ाई 19 अक्तूबर, 2006 | भारत और पड़ोस श्रीलंका शांति वार्ता की तारीख़ तय10 अक्तूबर, 2006 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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