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तमिल विद्रोही नेता बालासिंघम का निधन | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
तमिल विद्रोहियों के वरिष्ठ नेता एंटोन बालासिंघम का लंदन में निधन में हो गया है. बालासिंघम तमिल विद्रोहियों की ओर से शांति वार्ताओं में मुख्य वार्ताकार की भूमिका निभा रहे थे. वे पिछले कुछ समय से कैंसर से जूझ रहे थे, तमिल विद्रोहियों ने उनके निधन के समाचार की पुष्टि कर दी है. बालासिंघम को पित्ताशय का कैंसर था जो उनके शरीर के अन्य हिस्सों में भी फैल गया था. 68 वर्षीय बालासिंघम पिछले 15 दिनों से गंभीर रूप से बीमार थे. नॉर्वे के दूतों की मध्यस्थता में चल रही शांति वार्ताओं में वे शुरू से ही मुख्य वार्ताकार की हैसियत से भाग ले रहे थे. उन्हें तमिल विद्रोहियों की राजनीतिक आंकाक्षा के मुखर प्रवक्ता के रुप में देखा जाता था. ब्रिटेन की नागरिकता ले चुके बालासिंघम लंबे समय तक श्रीलंका से बाहर पेरिस और लंदन में रहे थे और उन्हें तमिल विद्रोहियों के लिए धन एकत्र करने वाले मुख्य व्यक्ति के रूप में भी जाना जाता था. बालासिंघम को तमिल विद्रोहियों के उदारवादी धड़े का प्रतिनिधि माना जाता था. बालासिंघम लगातार स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से जूझते रहे थे और दस वर्ष पहले उनके गुर्दे का प्रतिरोपण भी किया गया था. मौत से कुछ ही दिनों पहले बालासिंघम ने तमिलनेट से कहा, "मेरे लिए यह एक दुर्भाग्यपूर्ण बात है लेकिन जब मैं अपने लोगों की विकराल समस्याओं को देखता हूँ तो उसके सामने यह कुछ भी नहीं है." "मैं इस बात से काफ़ी दुखी हूँ कि अपनी बीमारी की वजह से अपने लोगों की सेवा नहीं कर पा रहा हूँ." | इससे जुड़ी ख़बरें 'एलटीटीई के खेद जताने का मतलब नहीं'27 जून, 2006 | भारत और पड़ोस राजीव की हत्या के लिए खेद है: एलटीटीई27 जून, 2006 | भारत और पड़ोस श्रीलंका में नई उम्मीद | भारत और पड़ोस श्रीलंका में शांति प्रक्रिया की कोशिशें तेज़07 मई, 2004 | भारत और पड़ोस 'सरकार ठोस प्रस्ताव रखे' | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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