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श्रीलंका में शांति प्रक्रिया की कोशिशें तेज़ | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
तमिल चरमपंथी संगठन एलटीटीई के मुख्य वार्ताकार एंटन बालासिंघम शांति प्रक्रिया को दोबारा पटरी पर लाने की कोशिशों के तहत श्रीलंका पहुँच गए हैं. बालासिंघम लंदन से राजधानी कोलंबो पहुँचे जहाँ से उन्हें एलटीटीई के क़ब्ज़े वाले इलाक़े किलीनोची ले जाया गया. बालासिंघम वहाँ एलटीटीई प्रमुख प्रभाकरण से मुलाक़ात करेंगे. श्रीलंका में नई सरकार के गठन के बाद एलटीटीई के साथ शांति प्रक्रिया की नए सिरे से कोशिश हो रही है. इन्हीं कोशिशों के तहत कुछ दिनों पहले नॉर्वे के विशेष दूत इरिक सोल्हेम ने एलटीटीई के राजनीतिक प्रमुख एसपी तमिलसेल्वन और राष्ट्रपति चंद्रिका कुमारतुंग के साथ मुलाक़ात की थी. नॉर्वे एलटीटीई और श्रीलंका सरकार के बीच शांति वार्ता में मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है. एलटीटीई के मुख्य वार्ताकार एंटन बालासिंघम अगले सप्ताह नॉर्वे के विदेश मंत्री जॉ पीटरसन से मिलने वाले हैं.पीटरसन अगले सप्ताह कोलंबो आ रहे हैं. नॉर्वे के विशेष दूत इरिक सोल्हेम ने राष्ट्रपति कुमारतुंग और एलटीटीई के वरिष्ठ नेता से मुलाक़ात के बाद कहा था कि बातचीत सकारात्मक रही है लेकिन उन्होंने ज़्यादा विवरण नहीं दिए. उन्होंने कहा था कि आशा की किरण दिख रही है और शांति वार्ता दोबारा शुरू हो सकती है लेकिन शायद बहुत जल्दी नहीं. |
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