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श्रीलंका शांति वार्ता में देर हो सकती है | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
श्रीलंका पहुँचे नॉर्वे के दूतों का कहना है कि तमिल टाइगर विद्रोहियों और सरकार के बीच शांति प्रक्रिया फिर से जल्दी ही शुरू होने की संभावना कम ही है. ये बयान जारी करने से पहले दूतों ने श्रीलंका की राष्ट्रपति चंद्रिका कुमारतुंग से निजी मुलाक़ात की थी. नॉर्वे के विदेश उपमंत्री विदा हेलगेसन ने कहा, "दोनों ही पक्षों के बातचीत के लिए राज़ी होने में कुछ समय लगेगा." हेलगेसन ने दोनों ही पक्षों से अपील की कि वे संघर्ष विराम का सम्मान करें और इस शांति विराम पर नज़र रखे लोगों के साथ मिलकर काम करें. सकारात्मक रविवार को हुई इस मुलाक़ात के बाद श्रीलंका की राष्ट्रपति के एक प्रवक्ता ने कहा कि वे विद्रोहियों के साथ मिलकर देश के पूर्व और उत्तर का विकास करना चाहते हैं. हेलगेसन ने इस बातचीत को काफ़ी व्यापक और सकारात्मक बताया है. नॉर्वे के शांति दूत एरिक सोलहम और श्रीलंका में नॉर्वे के राजदूत हैंस ब्रैट्सकर ने भी इस बातचीत में हिस्सेदारी की. ये बैठक कुछ घंटों चली. सोलहम सोमवार को तमिल विद्रोहियों से मिलने वाले हैं. तमिल विद्रोहियों ने पिछले महीने श्रीलंका सरकार के साथ दो साल पुराने संघर्षविराम को बनाए रखने पर सहमति जताई थी मगर राजनीतिक तौर पर बातचीत में गतिरोध बना रहा. नॉर्वे की सहायता से ही श्रीलंका सरकार और तमिल विद्रोहियों के बीच संघर्षविराम संभव हो पाया था. अभी भी नॉर्वे दोनों पक्षों के बीच मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है. |
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