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श्रीलंका ने फिर बुलाया नॉर्वे को | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
श्रीलंका की राष्ट्रपति चंद्रिका कुमारातुंगा ने नॉर्वे को फिर से तमिल विद्रोहियों के साथ बातचीत में से मध्यस्थ की भूमिका निभाने के लिए आमंत्रित किया है. नॉर्वे के प्रधानमंत्री ने कहा है कि उन्हें इस सिलसिले में कुमारतुंगा की ओर से निमंत्रण मिला है. श्रीलंका सरकार और तमिल विद्रोहियों के बीच शांतिवार्ता नवंबर में रूक गई थी. नॉर्वे के प्रयास से ही 2002 में दोनों पक्षों के बीच संघर्षविराम हुआ था जो तबसे जारी है. शर्त नॉर्वे ने इस बार मध्यस्थता के लिए हामी ज़रूर भरी है मगर साथ ही ये भी कहा है कि वे विद्रोही नेताओं की तरफ़ से भी निमंत्रण चाहते हैं. नॉर्वे के प्रधानमंत्री ने कहा,"अगर ये निमंत्रण आता है, और हमें आशा है कि ये आएगा, तो हम दोनों पक्षों से सलाह करेंगे कि शांति प्रक्रिया को कैसे आगे बढ़ाया जा सकता है". बीबीसी संवाददाता का कहना है कि विद्रोही इसके लिए तैयार हो सकते हैं क्योंकि वे शांति प्रक्रिया में अंतरराष्ट्रीय भागीदारी का समर्थन करते रहे हैं. श्रीलंका की शांति प्रक्रिया से नॉर्वे ने पिछले वर्ष तब हाथ खींच लिए जब श्रीलंका में राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री के बीच सत्ता संघर्ष के बीच तमिल विद्रोही बातचीत से अलग हो गए. |
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