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श्रीलंका में नए मंत्रिमंडल का गठन | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
श्रीलंका में राष्ट्रपति चंद्रिका कुमारतुंग ने नए मंत्रिमंडल का गठन कर दिया है. राष्ट्रपति कुमारतुंग ने महत्वपूर्ण रक्षा मंत्रालय का पद अपने पास रखा है. इसके अलावा उनके पास संवैधानिक मामले और शिक्षा मंत्रालय भी रहेगा. पिछले सप्ताह हुए आम चुनाव में राष्ट्रपति कुमारतुंग की अगुआई वाले यूनाइटेड पीपुल्स फ़्रीडम एलायंस को सबसे ज़्यादा सीटें मिली थी. इसके बाद उन्होंने महिंदा राजपक्षे को देश के नए प्रधानमंत्री के रूप में नियुक्त किया था. दूसरी ओर देश में एलटीटीई के दोनों गुटों के बीच चल रही हिंसा जारी है. देश का पूर्वोत्तर इलाक़ा इस हिंसा की चपेट में है. एलटीटीई संगठन से अलग हुए कर्नल करुणा के गुट को अपना निशाना बना रहा है. विवाद राष्ट्रपति कुमारतुंग के मंत्रिमंडल गठन पर विवाद की छाया भी रही और प्रस्तावित 35 सदस्यीय मंत्रिमंडल के सिर्फ़ 31 सदस्यों ने ही शपथ ली.
मंत्रिमंडल बँटवारे पर विवाद के कारण ही शपथ ग्रहण समारोह को कई बार टाला भी गया. गठबंधन में शामिल प्रमुख पार्टी जनता विमुक्ति पेरामुना यानी जेवीपी के सदस्य शपथ ग्रहण समारोह में नहीं पहुँचे. जेवीपी के चार सदस्यों को मंत्री पद की शपथ दिलाई जानी थी. दरअसल जेवीपी को मंत्री पद के बँटवारे पर आपत्ति थी. इसके अलावा उन्होंने राजपक्षे को प्रधानमंत्री बनाए जाने का भी विरोध किया था. जेवीपी को आम चुनाव में 40 सीटें मिली थी और माना जा रहा है कि यह विवाद नई सरकार के लिए शुभ संकेत नहीं. राष्ट्रपति कुमारतुंग ने तमिल विद्रोही संगठन एलटीटीई के कटु आलोचक लक्ष्मण कदिरगमर को महत्वपूर्ण विदेश मंत्रालय सौंपा है. कदिरगमर पहले भी विदेश मंत्री रह चुके हैं और माना जाता है कि पाँच देशों में एलटीटीई को प्रतिबंधित करने के पीछे कदिरगमर की ही महत्वपूर्ण भूमिका थी. इस आम चुनाव में कुमारतुंग के गठबंधन कौ 225 में से 105 सीटें मिली थी जो बहुमत से आठ कम है. ऐसे में एक प्रमुख गठबंधन पार्टी का विरोध उसे महंगा पड़ सकता है. |
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