| तमिल गुटों में हिंसा, हज़ारों का पलायन | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
श्रीलंका के पूर्वोत्तर इलाक़े में तमिल चरमपंथी संगठन एलटीटीई के दो गुटों के बीच जारी भीषण संघर्ष के कारण हज़ारों लोग पलायन कर रहे हैं. एलटीटीई और उससे अलग हुए कर्नल करुणा के गुट के बीच हो रहे संघर्ष में कम से कम नौ लोगों के मारे जाने की ख़बर है. हालाँकि अभी मारे गए लोगों की संख्या की आधिकारिक तौर पर पुष्टि नहीं हो सकी है. लेकिन बट्टिकलोवा ज़िले में डॉक्टरों का कहना है कि उन्होंने दो महिला विद्रोहियों का शव बरामद किया है. स्थिति सामान्य नहीं हो पाने की सूरत में इस संघर्ष का श्रीलंका की तमिल शांति प्रक्रिया पर घातक असर हो सकता है. श्रीलंका सेना के अनुसार देश के उत्तर पूर्वी हिस्से में वेरूगल नाम की नदी के दोनों पार से तमिल विद्रोहियों के दोनों गुटों के बीच गोलीबारी हो रही है. कर्नल करूणा ने पिछले महीने एलटीटीई से अलग होने के बाद अपना अलग गुट बनाया था. श्रीलंका सरकार के एक अधिकारी ने कहा है कि दोनों ही पक्षों की ओर से लोग हताहत हुए हैं. युद्धविराम पर ख़तरा तमिल विद्रोहियों और श्रीलंका सरकार के बीच दो साल पहले हुए युद्धविराम के बाद से पहली बार लड़ाई हो रही है. ये युद्धविराम 2002 में नॉर्वे की मध्यस्थता से हो सका था. फ़िलहाल श्रीलंका सेना ने तमिल गुटों के ताज़ा संघर्ष में तटस्थ भूमिका रखी है. मगर जानकारों का कहना है कि संघर्ष के क़ाबू में नहीं आ सकने की सूरत में श्रीलंका की सेना को हस्तक्षेप करना पड़ सकता है. ऐसे में दो साल पुराना युद्धविराम टूट सकता है जिसके गंभीर नतीजे होंगे क्योंकि ऐसे में श्रीलंका की शांति प्रक्रिया ही ख़तरे में पड़ जाएगी. |
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