| भारत सक्रिय भूमिका निभाए: राजपक्षे | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
वरिष्ठ राजनेता महिंदा राजपक्षे श्रीलंका के नए प्रधानमंत्री बन गए हैं. उन्होंने मंगलवार को अपने पद की शपथ ली. राजपक्षे जो 58 वर्ष के हैं, पिछली संसद में विपक्ष के नेता थे. उन्होंने उम्मीद जताई है कि पड़ोसी देश भारत श्रीलंका में शांति प्रक्रिया को दोबारा शुरु करने में सक्रिय भूमिका निभाएगा. शपथ ग्रहण करने से पहले उन्होंने तमिल चरमपंतियों के साथ शांति प्रक्रिया जारी रखने के पारे में अपनी प्रतिबद्धता की बात कही. उधर भारत लगातार श्रीलंका की शांति प्रक्रिया पर खुशी तो ज़ाहिर करता रहा है लेकिन इसमें सक्रिय भूमिका निभाने से कतराता रहा है. कई पार्टियों की सरकार सोमवार को दिन भर चले विचार-विमर्श के बाद राष्ट्रपति चंद्रिका कुमारतुंग ने राजपक्षे के नाम को स्वीकृति दी थी. श्रीलंका के संसदीय चुनाव में किसी भी पार्टी को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला है. लेकिन राष्ट्रपति चंद्रिका कुमारतुंग की अगुआई वाले यूनाइटेड पीपुल्स फ़्रीडम एलायंस को सबसे ज़्यादा सीटें मिली हैं. इस गठबंधन को 225 में से 105 सीटें मिली हैं. स्थिर सरकार के गठन के लिए गठबंधन दूसरी समान विचारधारा वाली पार्टियों से बात कर रहा है. सोमवार को यूनाइटेड पीपुल्स फ़्रीडम एलायंस की ओर से प्रधानमंत्री पद के लिए तीन दावेदार सामने आए थे. राष्ट्रपति कुमारतुंग की पहली पसंद थे पूर्व विदेश मंत्री लक्ष्मण कदिरगमर. लेकिन गठबंधन में उनके नाम को लेकर विरोध के स्वर उभरने लगे. जिसके बाद राजपक्षे के नाम पर विचार शुरू हुआ. दूसरी ओर पूर्व प्रधानमंत्री रनिल विक्रमसिंघे ने चेतावनी दी है कि सरकार की कमज़ोरी के कारण तमिल विद्रोही संगठन एलटीटीई के साथ शांति वार्ता पर असर पड़ सकता है. एलटीटीई ने भी बयान जारी करके कहा है कि अगर उन्हें स्वशासन का अधिकार नहीं दिया गया तो वे दोबारा संघर्ष शुरू कर देंगे. |
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