BBCHindi.com
अँग्रेज़ी- दक्षिण एशिया
उर्दू
बंगाली
नेपाली
तमिल
बुधवार, 15 नवंबर, 2006 को 08:29 GMT तक के समाचार
मित्र को भेजेंकहानी छापें
'दुरुपयोग बंद करें, फिर राहत का सोचेंगे'
सीलिंग
अनेक दुकानें पहले ही सील की जा चुकी हैं
दिल्ली के रिहायशी इलाक़ों से चल रही व्यवसायिक गतिविधियों के मामले पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि वह 25 हज़ार व्यापारियों को राहत देने पर विचार तभी करेगा यदि वे इन जगहों का दुरुपयोग बंद करते हैं.

इन 25 हज़ार लोगों ने सुप्रीम कोर्ट में हलफ़नामा दायर किया हुआ है कि वे रिहायशी इलाक़ों से चल रही व्यवसायिक गतिविधियाँ बंद करने के लिए तैयार हैं.

उधर दिल्ली के व्यापारियों ने बुधवार से भूख हड़ताल शुरु कर दी है जो आठ दिन चलेगी.

उनका कहना है कि केंद्रीय शहरी विकास मंत्री अपने आश्वासन को पूरे करें और यदि संसद में विधेयक पारित कर, क़ानून बनाकर ही व्यापारियों को राहत दी जा सकती है तो ऐसा ही किया जाए.

इस बारे में केंद्रीय शहरी विकास मंत्रालय और दिल्ली नगर निगम ने सोमवार को अर्ज़ी दायर की थी और कहा था कि कोर्ट को आश्वासन देने वाले व्यापारी रिहायशी इलाक़ो से बाहर चले जाएँगे.

सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश वाईके सभरवाल की अध्यक्षता वाली खंडपीठ का कहना था कि कोर्ट हलफ़नामा दायर करने वाले व्यापारियों को अनुमति देता है कि वे कोर्ट की निगरानी समिति को बताएँ कि उन्होंने अपना आश्वासन पूरा किया है.

कोर्ट के अनुसार यदि निगरानी समिति इस जानकारी को सही पाती है तो वह सुविधाएँ बंद नहीं करेगी और मकानों को सील नहीं करेगी.

निगरानी समिति को इस बारे में 20 नवंबर तक अपनी रिपोर्ट सौंपनी है.

'ग़ैर-क़ानूनी राजधानी'
दिल्ली में आख़िर इतने बड़े पैमाने पर मकान-दुकान ग़ैरक़ानूनी कैसे हैं?
इससे जुड़ी ख़बरें
सीलिंग के ख़िलाफ़ फिर दिल्ली बंद
07 नवंबर, 2006 | भारत और पड़ोस
सीलिंग: सरकार और अदालत में टकराव
02 नवंबर, 2006 | भारत और पड़ोस
सीलिंग अभियान पर फिलहाल रोक
01 नवंबर, 2006 | भारत और पड़ोस
'दिल्ली बंद' की वजह से ठहरा महानगर
01 नवंबर, 2006 | भारत और पड़ोस
दिल्ली बंद, सड़कों पर उतरे व्यापारी
29 अक्तूबर, 2006 | भारत और पड़ोस
सीलिंग पर पुनर्विचार याचिका का फ़ैसला
28 अक्तूबर, 2006 | भारत और पड़ोस
सुर्ख़ियो में
मित्र को भेजेंकहानी छापें
मौसम|हम कौन हैं|हमारा पता|गोपनीयता|मदद चाहिए
BBC Copyright Logo^^ वापस ऊपर चलें
पहला पन्ना|भारत और पड़ोस|खेल की दुनिया|मनोरंजन एक्सप्रेस|आपकी राय|कुछ और जानिए
BBC News >> | BBC Sport >> | BBC Weather >> | BBC World Service >> | BBC Languages >>