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'दुरुपयोग बंद करें, फिर राहत का सोचेंगे' | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
दिल्ली के रिहायशी इलाक़ों से चल रही व्यवसायिक गतिविधियों के मामले पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि वह 25 हज़ार व्यापारियों को राहत देने पर विचार तभी करेगा यदि वे इन जगहों का दुरुपयोग बंद करते हैं. इन 25 हज़ार लोगों ने सुप्रीम कोर्ट में हलफ़नामा दायर किया हुआ है कि वे रिहायशी इलाक़ों से चल रही व्यवसायिक गतिविधियाँ बंद करने के लिए तैयार हैं. उधर दिल्ली के व्यापारियों ने बुधवार से भूख हड़ताल शुरु कर दी है जो आठ दिन चलेगी. उनका कहना है कि केंद्रीय शहरी विकास मंत्री अपने आश्वासन को पूरे करें और यदि संसद में विधेयक पारित कर, क़ानून बनाकर ही व्यापारियों को राहत दी जा सकती है तो ऐसा ही किया जाए. इस बारे में केंद्रीय शहरी विकास मंत्रालय और दिल्ली नगर निगम ने सोमवार को अर्ज़ी दायर की थी और कहा था कि कोर्ट को आश्वासन देने वाले व्यापारी रिहायशी इलाक़ो से बाहर चले जाएँगे. सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश वाईके सभरवाल की अध्यक्षता वाली खंडपीठ का कहना था कि कोर्ट हलफ़नामा दायर करने वाले व्यापारियों को अनुमति देता है कि वे कोर्ट की निगरानी समिति को बताएँ कि उन्होंने अपना आश्वासन पूरा किया है. कोर्ट के अनुसार यदि निगरानी समिति इस जानकारी को सही पाती है तो वह सुविधाएँ बंद नहीं करेगी और मकानों को सील नहीं करेगी. निगरानी समिति को इस बारे में 20 नवंबर तक अपनी रिपोर्ट सौंपनी है. |
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