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मंगलवार, 07 नवंबर, 2006 को 00:20 GMT तक के समाचार
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सीलिंग के ख़िलाफ़ फिर दिल्ली बंद
प्रदर्शन करते व्यापारी
व्यापारियों ने पिछले हफ़्ते ही दिल्ली में तीन दिनों का बंद रखा था
दिल्ली में सीलिंग जारी रखने के सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद व्यापारी संगठनों ने फिर बंद आयोजित किया है. इस दौरान दिल्ली की ज़्यादातर दुकानें और बाज़ार बंद हैं.

इस दौरान सुरक्षा के कड़े इंतज़ाम किए गए हैं और पुलिस के अलावा रैपिड एक्शन फोर्स को भी तैनात किया गया है.

ग़ौरतलब है कि सोमवार को सुप्रीम कोर्ट ने राजधानी दिल्ली में रिहायशी इलाक़ों में चल रही दुकानों को सील करने की प्रक्रिया जारी रखने के आदेश दिए थे.

न्यायालय के इस आदेश के बाद केंद्र सरकार के मंत्रियों के समूह ने भी अपने हाथ खड़े कर दिए और कहा कि अदालत के आदेश का पालन तो करना ही पड़ेगा.

इस प्रक्रिया से पहले से ही नाराज़ व्यापारियों के संगठन ने इसका विरोध करने के लिए मंगलवार को 24 घंटे का बंद आयोजित किया है.

हड़ताल को देखते हुए सरकार ने सरकारी स्कूल दो दिनों के लिए बंद कर दिए हैं और निजी स्कूलों को भी ऐसा ही करने की सलाह दी है.

 हम तो जनता से चुने गए लोगों से पूछेंगे कि क़ानून की ऐसी कौन सी रेखा है जो 70 हज़ार लोगों के जीवन से ऊपर है. अब हमारी सीधी लड़ाई केंद्र और दिल्ली सरकार से है
प्रवीण खंडेलवाल, व्यापारी नेता

पिछले हफ़्ते व्यापारियों ने इस मामले में 72 घंटों के बंद का आयोजित किया था. तीन दिनों के बंद के अंतिम दिन आंदोलन हिंसक हो गया था और रास्ता रोकने के अलावा आंदोलनकारियों ने बसें जलाईं थी और तोड़फोड़ की थी.

इससे पहले सितंबर में सीलिंग का विरोध कर रहे लोगों ने तोड़फोड़ की थी जिसे रोकने के लिए पुलिस को गोली चलानी पड़ी थी जिससे चार लोगों की मौत हो गई थी.

व्यापारी नाराज़

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद सरकार के रुख़ से व्यापारी बेहद नाराज़ हैं.

सीलिंग ख़िलाफ़ बंद के दौरान काफ़ी हिंसा हुई थी

उनको लगता है कि सरकार उनकी मदद के लिए कोई ठोस क़दम नहीं उठा रही है.

व्यापारी संघ के महासचिव प्रवीण खंडेलवाल ने बीबीसी को बताया कि व्यापारियों को राहत न मिलने के कारण मंगलवार को 24 घंटे के बंद का आह्वान किया गया है.

उन्होंने कहा, "सुप्रीम कोर्ट ने ऐसे 2000 फ़ैसले सुनाए हैं जिन्हें सरकार आज तक लागू नहीं कर पाई है. ऐसे में व्यापारियों की रोज़ी-रोटी छीनना कहाँ का इंसाफ़ है."

प्रवीण खंडेलवाल ने कहा कि व्यापारी वर्ग सीलिंग के ख़िलाफ़ आख़िर तक लोकतांत्रिक तरीके से अपना विरोध करता रहेगा.

प्रवीण खंडेलवाल का कहना था," हम तो जनता से चुने गए लोगों से पूछेंगे कि क़ानून की ऐसी कौन सी रेखा है जो 70 हज़ार लोगों के जीवन से ऊपर है. अब हमारी सीधी लड़ाई केंद्र और दिल्ली सरकार से है."

अदालत का आदेश

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को सीलिंग बंद करने संबंधी सभी याचिकाओं को निरस्त कर दिया था.

सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने सरकार से कहा है कि सीलिंग के लिए वे अन्य सुरक्षा बलों की सहायता लें

अदालत ने कहा था कि कोई भी व्यक्ति डरा-धमकाकर सीलिंग नहीं रोक सकता और क़ानून का सम्मान करने वाले लोगों का हक़ नहीं छीन सकता.

केंद्र सरकार और दिल्ली नगर निगम ने शहर में उन 44 हज़ार व्यापारियों के ख़िलाफ़ सीलिंग अभियान दोबारा न शुरु करने के आवेदन दिए थे जिन्होंने रिहायशी इलाक़ों का दुरुपयोग बंद करने का कोर्ट को आश्वासन दिया था.

अदालत ने इन व्यापारियों को 31 अक्तूबर तक की राहत दी थी.

हालाँकि अदालत ने सीलिंग अभियान दोबारा कब शुरू किया जाए, इस पर कुछ भी स्पष्ट नहीं किया है.

इसके लिए अदालत ने सभी संबंधित अधिकारियों को सुप्रीम कोर्ट की निगरानी समिति से सलाह मशविरा करने को कहा है.

सुप्रीम कोर्ट ने साफ़ किया कि सीलिंग अभियान के तहत व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को सिर्फ़ बंद किया जाएगा न कि उन्हें तोड़ा जाएगा.

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