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दिल्ली के दुकानदारों को राहत नहीं मिली | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने दिल्ली के रिहायशी इलाक़ों में व्यावसायिक गतिविधियाँ 31 अक्तूबर तक बंद करने की अवधि को आगे बढ़ाने से इनकार कर दिया है. इससे 40 हज़ार से ज़्यादा छोटे दुकानदार प्रभावित होंगे. दिल्ली में सीलिंग या दुकाने बंद करने के मामले में दायर केंद्र सरकार और व्यापारियों की याचिकाओं की सुनवाई को दौरान सर्वोच्च न्यायालय ने ये आदेश सुनाया है. लेकिन इसी संबंध में उन दुकानदारों को कुछ राहत मिली है जो सरकार की दो अधिसूचनाओं के अंतरगत आते हैं. इन दुकानदारों से कोर्ट के फ़ैसले को मानना के बारे में लिखित आश्वासन देने के लिए कहा गया था. अब इनके लिए ये आश्वासान देने की अवधि 31 जनवरी 2007 तक बढ़ा दी गई है. पिछले साल सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के बाद नगर निगम ने दुकानें सील करने का काम शुरु किया था लेकिन कुछ हफ़्ते पहले इसका जमकर विरोध हुआ था. कई जगह प्रदर्शन हुए थे और चार लोग मारे गए थे और कई घायल हुए थे. व्यापारियों का कहना है कि न्यायालय के आदेश से लगभग पाँच लाख लोगों की रोज़ी-रोटी पर असर पड़ेगा. | इससे जुड़ी ख़बरें अवैध इमारतें गिराने का काम शुरू29 जुलाई, 2006 | भारत और पड़ोस सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र को फटकार लगाई17 जुलाई, 2006 | भारत और पड़ोस अवैध निर्माण मामले पर विधेयक पारित12 मई, 2006 | भारत और पड़ोस वड़ोदरा में अवैध निर्माण गिराने पर रोक04 मई, 2006 | भारत और पड़ोस दिल्ली के अवैध निर्माणों पर कड़ा रुख़18 जनवरी, 2006 | भारत और पड़ोस दिल्ली में अतिक्रमण हटाओ अभियान19 दिसंबर, 2005 | भारत और पड़ोस ताज पर नरम पड़ीं मायावती | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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