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दिल्ली में अतिक्रमण हटाओ अभियान | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत की राजधानी दिल्ली में अवैध रूप से बनाए गए 18 हज़ार घरों और इमारतों को ढहाने का काम शुरू हुआ है जिसने एक विवाद खड़ा कर दिया है. दिल्ली हाईकोर्ट ने अपने एक फ़ैसले में राज्य सरकार को आदेश दिए हैं कि प्रदेश भर में बने इन अवैध घरों और इमारतों को चार सप्ताह की समयावधि के भीतर तत्काल तोड़ा जाए. इसी आदेश के आधार पर दिल्ली नगर निगम ने प्रदेश भर से अवैध इमारतों को हटाने की कार्रवाई शनिवार से शुरू कर दी है. हाईकोर्ट का यही फ़ैसला अब दिल्ली सरकार के गले की फांस बन गया है क्योंकि सरकार की इस कार्रवाई का लोग काफ़ी विरोध कर रहे हैं. जिन भवनों को तोड़ने के आदेश हैं वे पीतमपुरा, जनकपुरी, लाजपतनगर, पटेलनगर, विकासपुरी, नरेला, नजफ़गढ़, करोलबाग, ग्रीन पार्क औऱ रजौरी गार्डन में स्थित हैं. विरोध दिल्ली नगर निगम के साथ दिल्ली सरकार ने रविवार को जब इस आदेश को अमलीजामा पहनाने का काम शुरू किया तो हज़ारों की संख्या में लोग इस फ़ैसले के विरोध में सड़कों पर उतर आए. नाराज़ लोगों में से एक ने कहा, "जब यह निर्माण हो रहा था, तब सरकार कहाँ थी. ये सारा निर्माण इसलिए होता है, क्योंकि अधिकारी हमसे रिश्वत लेते हैं. अगर अधिकारी न चाहें तो कोई एक ईंट भी नहीं लगा सकता है." लोगों ने कई जगह पर प्रदर्शन किए, दिल्ली परिवहन निगम की बसों में तोड़फोड़ की, पथराव किया और राज्य सरकार के विरोध में नारे भी लगाए. उग्र भीड़ को नियंत्रित करने और अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई को चालू रखने के लिए नगर निगम को अतिरिक्त पुलिस बल की मदद लेनी पड़ रही है. संकट में शीला अवैध निर्माण हटाने की इस मुहिम से राज्य सरकार की छवि तो प्रभावित हो ही रही है, साथ ही मुख्यमंत्री शीला दीक्षित ख़ुद संकट में पड़ती नज़र आ रही है. कांग्रेस पार्टी की राज्य इकाई ने इस फ़ैसले को अमलीजामा पहनाने की कार्रवाई का विरोध करते हुए रविवार को ही राज्य के तमाम विधायकों और सांसदों की आपात बैठक भी बुलाई और वर्तमान हालात पर चर्चा की. हालाँकि ख़ुद शीला दीक्षित इन बैठकों में शामिल नहीं हुईं पर मामले की गंभीरता को देखते हुए केंद्र सरकार के शहरी विकास मंत्री जयपाल रेड्डी को पूरे मामले में हस्तक्षेप करना पड़ा. रविवार को इस संदर्भ में शीला दीक्षित की जयपाल रेड्डी से मुलाकात भी हुई. उधर विपक्ष ने भी इस मसले पर सरकार को आड़े हाथों लिया है. दिल्ली विधानसभा में विपक्ष के नेता डॉ. हर्षवर्धन ने कहा, "ये अवैध निर्माण कांग्रेस के शासनकाल में हुआ और विपक्ष इस मामले में विधानसभा में काम रोको प्रस्ताव लाएगा." दिल्ली के प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष, रामबाबू शर्मा ने कहा है कि उनकी पार्टी सदन में इस बारे में एक प्रस्ताव लाएगी ताकि इस पूरे मसले के हल के लिए कोई बीच का रास्ता निकाला जा सके. उल्लेखनीय है कि दिल्ली में झुग्गी बस्तियों को हटाने की तमाम कार्यवाही सरकार की ओर से होती रही हैं लेकिन मध्यम वर्ग और धनी वर्ग के रिहायशी इलाके में सरकार की ओर से यह अपने आप में पहली बड़ी कार्रवाई है. | इससे जुड़ी ख़बरें 'नर्सरी में दाखिले के लिए इंटरव्यू नहीं'19 दिसंबर, 2005 | भारत और पड़ोस पानी का निजीकरण नहीं -शीला दीक्षित21 अगस्त, 2005 | भारत और पड़ोस संसद से पुरानी दिल्ली तक मेट्रो रेल02 जुलाई, 2005 | भारत और पड़ोस दिल्ली में देर तक खुलेंगी दुकानें15 सितंबर, 2004 | भारत और पड़ोस दिल्ली मेट्रो में दुनिया की दिलचस्पी03 अगस्त, 2004 | भारत और पड़ोस फिर दिल्ली को पूर्ण राज्य बनाने का वादा25 नवंबर, 2003 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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