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'नर्सरी में दाखिले के लिए इंटरव्यू नहीं' | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
दिल्ली उच्च न्यायालय ने निजी स्कूलों को आदेश दिया है कि वे दाखिले की ऐसी वैकल्पिक नीति बनाएँ जिससे नर्सरी में दाखिला लेने वाले बच्चों या उनके माता-पिता का इंटरव्यू या साक्षात्कार न लेना पड़े. उच्च न्यायालय ने निजी स्कूलों से अगले साल 31 जनवरी तक अपना जबाव दायर करने को कहा है. न्यायालय ने अपना आदेश, बच्चों को दाखिला दिलाने में दिक्कत झेल रहे कई माता-पिता की याचिका पर सुनाया है. न्यायालय ने ये भी कहा है कि यदि निजी स्कूल अपने सुझाव नहीं देते हैं तो हो सकता है कि न्यायालय को हस्तक्षेप कर पूरे में अंतिम निर्णय सुनाना पड़े. याचिकाकर्ताओं के वकील अशोक अग्रवाल का कहना था, "न्यायालय ने कड़ा रुख़ अपनाया है लेकिन अधिकतर निजी स्कूलों का मानना है कि उन्हें बहुत कम समय दिया गया है और इतने समय में कोई वैकल्पिक व्यवस्था सुझाना बहुत मुश्किल होगा. एपीजे स्कूल के प्रधानाचार्य वीके अरोड़ा का कहना था, "यदि हम माता-पिता से मिलकर बात ही नहीं कर सकते तो फिर और क्या करें? विकल्प तो यही है कि लॉटरी निकाली जाए लेकिन तब हम माता-पिता को नहीं जान पाएँगे और वे हमें नहीं जान पाएँगे." अधिकतर स्कूलों का कहना है कि उन्हें नर्सरी में दाखिले के लिए हर साल पाँच हज़ार से ज़्यादा आवेदन मिलते हैं और इंटरव्यू ही दाखिले का सबसे सरल तरीका है. | इससे जुड़ी ख़बरें बच्चों के भोजन में शराब और भाँग27 जुलाई, 2004 | भारत और पड़ोस बदलता चेहरा नए राज्य का | भारत और पड़ोस 200 स्कूल बंद करने के आदेश18 जुलाई, 2004 | भारत और पड़ोस दुखों के सागर में जैसे डूबा कुंभकोणम17 जुलाई, 2004 | भारत और पड़ोस श्रीनगर में 115 साल पुराना स्कूल जला05 जुलाई, 2004 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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