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बच्चों के भोजन में शराब और भाँग | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
छत्तीसगढ़ राज्य के एक प्राथमिक स्कूल में दो शिक्षक बच्चों को दोपहर के भोजन में लगातार भाँग और शराब मिलाकर खिला रहे थे. इन दोनों शिक्षकों को निलंबित कर दिया गया है और उनके ख़िलाफ़ पुलिस में रिपोर्ट दर्ज कराने की तैयारी चल रही है. अधिकारियों ने जाँच के बाद कहा है कि ख़ुद शराब पीने के आदी दोनों शिक्षक शराब इसलिए मिला रहे थे कि खाना स्वादिष्ट बनेगा और भांग का उपयोग दाल को जल्दी पकाने के लिए किया जा रहा था. इनमें से एक स्कूल के हेडमास्टर हैं और दूसरे सहायक शिक्षक. यह घटना राज्य की राजधानी रायपुर से सौ किलोमीटर दूर सरायपाली के एक गाँव चंडीमोना में हुई. इस प्राथमिक स्कूल में पहली से लेकर पाँचवीं तक कक्षाएँ हैं और 91 बच्चों वाले इस स्कूल में तीन शिक्षक थे. जिनमें से दो अब निलंबित हो चुके हैं. यूँ तो यह सिलसिला बहुत दिनों से चल रहा था लेकिन यह मामला खुला गत 24 जुलाई को जब लोगों की शिकायत सुनने गए ज़िला कलेक्टर के सामने गाँव के लोगों ने शिकायत की. ज़िला कलेक्टर ने उसी समय सबडिविज़नल मजिस्ट्रेट (एसडीएम) को इस घटना की जाँच के आदेश दिए थे. इस घटना की जाँच के बाद एसडीएम अशोक श्रीवास्तव ने बीबीसी हिंदी को बताया, "जाँच से पता चला कि हेडमास्टर आरक्षित पटेल और सहायक शिक्षक देवादी चौधरी बच्चों के सामने ही दाल में भांग की गोलियाँ मिला देते थे और बच्चों को बताते थे कि इससे दाल जल्दी पकेगी." एसडीएम अशोक श्रीवास्तव के अनुसार, "दोनों ही शिक्षक शराब पीने के आदी थे और 19 जुलाई को उन्होंने चावल को स्वादिष्ट बनाने के लिए ढेर सारी शराब मिला दी थी." उनका कहना था कि दोनों शिक्षकों ने उनके सामने ग़लती स्वीकार कर ली है. स्थानीय पत्रकारों का कहना है कि भांग मिली हुई दाल तो बच्चे खा ही रहे थे और 19 जुलाई को भी कुछ छोटे बच्चों ने तो शराब मिला हुआ खाना भी खा लिया था, लेकिन शराब की गंध के कारण बाद में खाना फेंक दिया गया. जाँच अधिकारी श्रीवास्तव ने बताया कि जिस दिन वे जाँच के लिए स्कूल पहुँचे उस दिन भी शिक्षकों के पास स्कूल में शराब और भांग रखी हुई थी लेकिन दोनों शिक्षकों ने उसे फेंक दिया. उन्होंने बताया कि बच्चों की मदद से उन्होंने भांग और शराब भी ज़ब्त की थी. एसडीएम ने बताया कि हेडमास्टर आरक्षित पटेल के बारे में शराब पीने की शिकायतें मिली थीं और वे पहले भी एक बार शराब पीने के आरोप में निलंबित हो चुके हैं. उन्होंने बताया कि दोनों शिक्षकों को निलंबित कर दिया गया है और ज़िला कलेक्टर मनीष त्यागी ने ज़िला शिक्षा अधिकारी से कहा है कि वे आगे की कार्रवाई करें. अधिकारियों का कहना है कि अब इन शिक्षकों के ख़िलाफ़ पुलिस रिपोर्ट दर्ज करवाने की तैयारी चल रही है. अभिभावक नाराज़ स्थानीय पत्रकारों से बातचीत में बच्चों ने बताया कि हेडमास्टर हमेशा शराब पिए हुए होते हैं और दूसरे शिक्षक भी शराब पीते रहते हैं. बच्चों ने बताया कि पंचायत की ओर से दोपहर का भोजन पकाने के लिए नियुक्त महिला राजकुमारी भी हेडमास्टर के कहने पर खाने में भांग और शराब मिला रही थी. उधर इस घटना से नाराज़ बच्चों के माँ-बाप का कहना है कि दोनों शिक्षक मिलकर पहले भी खाने में शराब मिला रहे थे लेकिन उसकी मात्रा कम होने के कारण बच्चों को पता नहीं चल रहा था. स्कूल में पढ़ने वाले एक बच्चे के पिता रामलाल चौधरी ने कहा, "हेडमास्टर स्कूल में ही बैठकर शराब पीते रहते थे और हर वक्त नशे में रहते थे. समझ में नहीं आ रहा था कि हम अपने बच्चों को स्कूल में पढ़ाने भेजते थे या यह सब देखने के लिए." दूसरे पिता अयोध्या प्रसाद चौधरी इस बात से संतुष्ट हैं कि ज़िला कलेक्टर से शिकायत के बाद कार्रवाई हुई और दोनों शिक्षकों को हटा दिया गया है. |
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