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मंगलवार, 25 नवंबर, 2003 को 21:19 GMT तक के समाचार
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फिर दिल्ली को पूर्ण राज्य बनाने का वादा
शीला दीक्षित
शीला दीक्षित पिछले पाँच सालों से दिल्ली की मुख्यमंत्री हैं

दिल्ली में पिछले बार के चुनाव बेहद नाटकीय थे.

नाटकीय इस लिहाज से कि प्याज़ के दाम अचानक 40-45 रुपए किलो तक पहुँच गए थे और चुनाव परिणाम एकतरफ़ा कांग्रेस के पक्ष में आ गए थे.

तब सत्तासीन भारतीय जनता पार्टी ने साहिब सिंह वर्मा को हटाकर सुषमा स्वराज को अचानक ही मुख्यमंत्री बनाकर एक प्रयोग किया था लेकिन यह काम नहीं आया.

भाजपा ने कहा कि प्याज़ ने उनकी सरकार छीन ली.

अब कांग्रेस को सत्ता में पाँच साल हो चुके हैं और भारतीय जनता पार्टी विपक्ष में है.

इस बार भाजपा ने विकास को चुनावी मुद्दा बनाया है और उसका आरोप है कि पिछले पाँच सालों में दिल्ली में बिजली और पानी की स्थिति बिगड़ी है.

लेकिन दिल्ली की हर सीट पर स्थानीय मुद्दों की भरमार है.

मेट्रो पर दावा

और विकास में यातायात व्यवस्था को दुरुस्त करने का वादा जोरशोर किया जा रहा है.

भाजपा भी मेट्रो रेल पर दावा जता रही है
मदन लाल खुराना

क्योंकि यातायात ऐसी समस्या है जिससे दिल्लीवासियों को निकट भविष्य में छुटकारा मिलता दिखता नहीं है.

शायद इसीलिए यह कांग्रेस के लिए भी चुनावी मुद्दा है.

कांग्रेस विकास कार्यों को ही मुद्दा बनाकर चुनाव लड़ रही है.

हालांकि मुख्यमंत्री शीला दीक्षित यह मान लेती हैं कि बिजली का निजीकरण से बात बनी नहीं.

वे मानती हैं कि बिजली-पानी की स्थिति में और सुधार की ज़रुरत है और उनका प्रयास होगा कि अगले कार्यकाल में वे सब कुछ सुधार लें.

पिछले पाँच सालों में दिल्ली में बने ओवर ब्रिज और मेट्रो रेल को शीला दीक्षित विकास का पैमाना बता रही हैं.

वहीं भाजपा भी मेट्रो रेल पर दावा जता रही है.

भाजपा ने पूर्व मुख्यमंत्री मदनलाल खुराना को मुख्यमंत्री पद का दावेदार बनाया है और खुराना अपने पुराने काम भी लोगों को याद दिलाने की कोशिश कर रहे हैं.

भाजपा के लिए दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा दिलवाना एक पुराना मुद्दा है लेकिन पार्टी भी जानती है कि यह एक जटिल मुद्दा है.

हालांकि कांग्रेस भी पूर्णराज्य का दर्जा दिलवाने का आश्वासन दे रही है.

भाजपा की एक दिक्कत यह भी है कि वह कांग्रेस की सरकार पर क़ानून व्यवस्था को लेकर और आवास विकास को लेकर कोई आरोप नहीं लगा सकती क्योंकि ये दोनों दिल्ली सरकार के हाथों की बात नहीं है बल्कि इस पर केंद्र का नियंत्रण है और वहाँ भाजपा ख़ुद सरकार चला रही है.

दिल्ली विधानसभा चुनावों पर एक नज़र
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