| संसद से पुरानी दिल्ली तक मेट्रो रेल | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
सत्ता के मौजूदा केंद्र संसद और कभी सत्ता के पूर्व केंद्र पुरानी दिल्ली को जोड़नेवाली मेट्रो सेवा का शनिवार को संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन की अध्यक्ष सोनिया गाँधी ने उदघाटन किया. यह सेवा रविवार से आम जनता के लिए प्रारंभ हो जाएगी. संसद भवन परिसर के नज़दीक हुए समारोह में सोनिया गाँधी ने इस क्षेत्र की पहली मेट्रो को हरी झंडी दिखाई. पुरानी दिल्ली के कश्मीरी गेट से केंद्रीय सचिवालय के बीच चलनेवाली भूमिगत मेट्रो सात किलोमीटर के अपने रास्ते में सात स्टेशनों पर रुकेगी. इस अवसर पर सोनिया गाँधी ने कहा कि मेट्रो से दिल्ली का चेहरा ही बदल जाएगा. इस 48 किलोमीटर के खुले और 13 किलोमीटर के भूमिगत मार्गवाली महत्वाकांक्षी दिल्ली मेट्रो रेल परियोजना पर कुल 10,571 करोड़ रूपए का खर्च आएगा. दिल्ली के शाहादरा से रिठाला तक के लगभग 23 किलोमीटर लंबे रूट पर मार्च 2004 से ही मेट्रो रेल दौड़ रही है. जानकार मानते हैं कि कोलकाता में मेट्रो के निर्माण और उसे चालू करने में बहुत ज्यादा वक़्त लगा और कोलकाता के लोगों को इसके कारण बहुत परेशानी भी उठानी पड़ी. इसका मनोवैज्ञानिक प्रभाव ये पड़ा कि मेट्रो पटरियों पर तो चढ़ी लेकिन लोगों के दिल से उतर गई. पर दिल्ली मेट्रो के निर्माण की कार्यशैली को अलग है. लोगों को ख़बर भी नहीं होती कि काम कब कहाँ पहुँचा और कब ख़त्म हो गया. सब कुछ बड़े-बड़े परदों और टीन की चादरों से घिरा हुआ चलता है. जमीन के नीचे काम चलता है और ऊपर ट्रैफिक बेरोकटोक चलता है. |
| |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||