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पानी का निजीकरण नहीं -शीला दीक्षित | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
दिल्ली की मुख्यमंत्री शीला दीक्षित ने कहा है कि दिल्ली में पानी का निजीकरण नहीं किया जा रहा है. उन्होंने स्पष्ट कर दिया है कि बिजली की बढ़ी हुई दर का भुगतान करना होगा. शीला दीक्षित ने कहा कि यह कहना ठीक नहीं होगा कि दिल्ली में रहने की बेहतर व्यवस्था नहीं है क्योंकि अगर ऐसा होता तो लोग दिल्ली आना क्यों जारी रखते. 'आपकी बात बीबीसी के साथ' कार्यक्रम में श्रोताओं के सवालों के जवाब देते हुए मुख्यमंत्री दीक्षित ने माना कि दिल्ली में संसाधनों की चुनौती है. दिल्ली में पानी के निजीकरण के सवाल पर उन्होंने कहा कि वे स्वीकार करती हैं कि ऐसा माहौल बना हुआ है कि दिल्ली में पानी का निजीकरण हो रहा है लेकिन यह सच नहीं है. उन्होंने कहा कि दिल्ली में पानी का निजीकरण नहीं हो रहा है. मुख्यमंत्री ने कहा कि वे जल्दी ही स्वयंसेवी संगठनों की एक बैठक बुलाने जा रही हैं और वे इसमें स्पष्ट कर देंगी कि सरकार ऐसा कोई फ़ैसला नहीं कर रही है. पानी की कमी को स्वीकार करते हुए उन्होंने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि सोनिया विहार का मामला जल्दी ही निपट जाएगा और दिल्ली को 300 क्यूसेक पानी मिलेगा. आधुनिक शहर एक श्रोता के सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि पिछले कुछ सालों में दिल्ली का स्वरुप बदला है और आने वाले दिनों में बहुत कुछ बदलेगा. उनका कहना था कि दिल्ली दुनिया का सबसे ज़्यादा भीड़ वाला शहर है और यहाँ यातायात को संयोजित करने की बहुत ज़रुरत है. शीला दीक्षित ने कहा, "दिल्ली में हर साल पाँच लाख की जो आबादी बढ़ रही है वह एक चुनौती है लेकिन दिल्ली की बढ़ती आबादी भी ख़ुशहाल आबादी है." उन्होंने कहा कि दिल्ली में आवास एक समस्या है और दिल्ली ने केंद्र सरकार से और ज़मीन माँगी है जिससे कि मध्यवर्ग और ग़रीबों के आवास की समस्या हल की जा सके. शीला दीक्षित ने एक सवाल के जवाब में कहा कि बिजली की जो दरें बढ़ाई गई हैं उसका फ़ैसला नियामक आयोग ने सभी से बात करने के बाद लिया था. उनका कहना है कि उनकी जानकारी में यह बात है कि कुछ लोगों ने बिजली का बिल न चुकाने की धमकी दी है लेकिन उन्होंने साफ़ कहा कि इससे बिजली बोर्ड निपटेगा या फिर नियामक आयोग. क़ानून-व्यवस्था दिल्ली की क़ानून व्यवस्था के बारे में उन्होंन कहा, "दिल्ली देश का अकेला ऐसा राज्य है जहाँ क़ानून व्यवस्था राज्य सरकार के हाथों में नहीं है. हमने इसके लिए केंद्र सरकार से अनुरोध किया है." मुख्यमंत्री दीक्षित का कहना था कि इस बारे में तीन महीने पहले वे एक प्रतिनिधि मंडल के साथ केंद्रीय गृहमंत्री से भी मिली थीं. उनका कहना था कि कांग्रेस के घोषणा पत्र में था कि दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा दिलवाया जाएगा और उन्हें उम्मीद है कि केंद्र सरकार इसके लिए समुचित क़दम उठाएगी. उन्होंने माना कि दिल्ली में क़ानून व्यवस्था एक चुनौती है लेकिन उन्होंने कहा कि हर दिन बाहर से आने वाले लोगों के कारण दिल्ली की समस्या अन्य तरह की है. दिल्ली की मुख्यमंत्री ने एक सवाल के जवाब में कहा कि उनकी सरकार रहे न रहे दिल्ली राष्ट्रमंडल खेलों के लिए तैयार रहेगी ऐसा उनका विश्वास है. उन्होंने इस बात को ख़ारिज कर दिया कि दिल्ली रहने के लिए बेहतर जगह नहीं बन रही. उन्होंने कहा, "यदि वातावरण अच्छा न होता तो लोग क्यों आते यहाँ रहने." |
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