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दिल्ली के अवैध निर्माणों पर कड़ा रुख़ | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
दिल्ली हाईकोर्ट ने अवैध निर्माणों पर कड़ा रुख़ अख़्तियार करते हुए कहा है कि दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) पहले उन लोगों के अवैध निर्माण गिराए जो प्रभावशाली लोग हैं. हाईकोर्ट ने कहा है कि एमसीडी के कमिश्नर की नियुक्ति संसद के क़ानून के आधार पर हुई है और उन्हें किसी भी दबाव में आए बिना अवैध निर्माण गिराने का कार्य करना चाहिए. इससे पहले एमसीडी ने एक सर्वेक्षण रिपोर्ट पेश करते हुए कहा कि दिल्ली नगर निगम क्षेत्र में 80 प्रतिशत मकानों में अवैध निर्माण हुआ है. लेकिन हाईकोर्ट ने इसे अस्वीकार करते हुए ख़ारिज कर दिया. उल्लेखनीय है कि हाईकोर्ट के आदेश पर दिल्ली में पिछले कुछ दिनों से अवैध निर्माण गिराए जाने का कार्य चल रहा है लेकिन ख़बरें आ रही थीं कि कुछ प्रभावशाली लोगों के निर्माण कार्यों को छोड़ दिया गया है. इसे लेकर राजनीतिक खींचतान चल रही है और सत्ताधारी कांग्रेस में ही विवाद की स्थिति बन गई है. न्यायाधीश वीरेंदर जैन और न्यायमूर्ति रेखा शर्मा के दो सदस्यीय पीठ ने अवैध निर्माण के मामले की सुनवाई करते हुए एमसीडी से कहा कि पहले उन लोगों के अवैध निर्माण गिराए जाने चाहिए जो प्रभावशाली हैं. अदालत का कहना था कि इससे आम लोगों के बीच ये संदेश भी जाएगा कि सत्ता के नज़दीक होने या पैसा कमा लेने से क़ानून से बचा जा सकता है. हाईकोर्ट ने आदेश दिए हैं कि उन अधिकारियों और इंजीनियरों पर भी दो महीने के भीतर कार्रवाई होनी चाहिए जिनके कार्यकाल में ये अवैध निर्माण हुए हैं. इसके अलावा कोर्ट ने लाल डोरा क्षेत्र में भी अवैध निर्माण हटाए जाने के आदेश दिए हैं. लाल डोरा शहरों के आसपास का वह क्षेत्र होता है जहाँ ऐसी ग्रामीण बसाहट होती है जिसका अधिग्रहण नहीं किया जा सकता. एमसीडी के सर्वेक्षण को ख़ारिज करते हुए हाईकोर्ट ने कहा कि 80 प्रतिशत मकानों में अवैध निर्माण हुआ है ऐसा कहने का मतलब दिल्ली के उन लोगों का अपमान होगा जिन्होंने ईमानदारी से क़ानून का पालन किया है. हाईकोर्ट ने कहा कि एमसीडी ये डर पैदा करने की कोशिश न करे कि अवैध निर्माणों की संख्या इतनी अधिक है कि उसे गिराना संभव नहीं होगा. | इससे जुड़ी ख़बरें ताज में पानी घुसने का ख़तरा | भारत और पड़ोस ताज मामले पर जाँच का आदेश | भारत और पड़ोस ताज पर नरम पड़ीं मायावती | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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