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बुधवार, 20 सितंबर, 2006 को 16:05 GMT तक के समाचार
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दिल्ली की हिंसा में चार लोग मारे गए
पथराव
दिल्ली में कई स्थानों पर पथराव और आगजनी की घटनाएँ हुई हैं
दिल्ली में रिहाइशी इलाक़ों में चलने वाली दुकानों को बंद कराने के विरोध में राजधानी में बुधवार को हुई हिंसा में मारे जाने वाले लोगों की संख्या बढ़कर चार हो गई है.

बुधवार को हुई हिंसा में पहले दो लोगों के मरने की बात पुलिस ने कही थी लेकिन अब गुरूवार को यह संख्या बढ़कर चार हो गई है.

सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर चल रही इस सरकारी मुहिम के विरोध में दिल्ली के दुकानदारों ने बुधवार को हड़ताल का आह्वान किया था जिसने कई स्थानों पर हिंसक रूप धारण कर लिया.

दिल्ली के दुकानदारों और उनमें काम करने वाले कर्मचारियों ने पूरी राजधानी में जगह-जगह यातायात में बाधा डाली, नारेबाज़ी हुई.

कई स्थानों पर प्रदर्शनकारियों ने सरकारी वाहनों को आग लगा दी और पुलिस पर पथराव भी किया, इसके जवाब में अनेक स्थानों पर पुलिस ने हल्का लाठीचार्ज किया और आँसू गैस के गोले छोड़े.

 स्थिति को नियंत्रित करना बहुत ज़रूरी हो गया था इसलिए गोली चलानी पड़ी
दीपेंद्र पाठक, वरिष्ठ पुलिस अधिकारी

दिल्ली के वरिष्ठ पुलिस अधिकारी दीपेंद्र पाठक ने बीबीसी को बताया कि पूर्वी दिल्ली में "उग्र भीड़ बहुत हिंसक हो गई और सरकारी संपत्ति को नुक़सान पहुँचाना शुरू कर दिया."

उन्होंने बताया कि प्रदर्शनकारियों ने कई बसों को जला दिया और पुलिसकर्मियों पर हमला बोल दिया जिसमें कई पुलिसकर्मी घायल हुए, घायलों में पुलिस उपायुक्त स्तर के एक अधिकारी भी शामिल हैं.

दीपेंद्र पाठक ने कहा, "स्थिति को नियंत्रित करना बहुत ज़रूरी हो गया था इसलिए गोली चलानी पड़ी."

कड़ी सुरक्षा

दिल्ली के जिन इलाक़ों में दुकानों को बंद कराने का काम चल रहा है वहाँ बड़े पैमाने पर पुलिस और अर्धसैनिक बल तैनात किए गए हैं.

दिल्ली पुलिस
दिल्ली पुलिस ने कई स्थानों पर आँसू गैस के गोले छोड़े

पुलिस ने कहा है कि राजधानी में प्रदर्शन के दौरान सरकारी संपत्ति को नुक़सान पहुँचाने के आरोप में कुछ लोगों को गिरफ़्तार भी किया गया है लेकिन उनकी सही संख्या नहीं बताई गई है.

दुकानदारों की हड़ताल की वजह से दिल्ली में जनजीवन काफ़ी अस्त-व्यस्त रहा, कई इलाक़ों में दुकान पूरी तरह बंद रहे.

लोग दुकानों को बंद कराने के इस अभियान की वजह से काफ़ी असुविधा महसूस कर रहे हैं और यही सवाल ज़्यादातर लोग पूछ रहे हैं कि अगर ये दुकान ग़ैर-क़ानूनी हैं तो सरकार ने इन्हें बनने और वर्षों तक चलने क्यों दिया.

केंद्रीय शहरी विकास मंत्री जयपाल रेड्डी ने बुधवार को हुई हिंसा को दुर्भाग्यपूर्ण बताया है और आश्वासन दिया है कि सरकार पूरे मामले पर विचार कर रही है.

दिल्ली की मुख्यमंत्री शीला दीक्षित ने लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की है.

सुप्रीम कोर्ट ने पिछले ही दिनों निर्देश दिया है कि रिहाइशी इलाक़ों में चलने वाली दुकानों को बंद कराने का काम जारी रहना चाहिए.

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