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भूकंप के साल भर बाद भी मदद का इंतज़ार | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर और भारत प्रशासित राज्य जम्मू कश्मीर में आए भूकंप को आठ अक्तूबर, रविवार को एक साल पूरा हो गया. दोनों ही जगह भूकंप में मरने वालों को श्रद्धांजलि दी जा रही है और उनकी याद में कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं. पाकिस्तान में आयोजित एक कार्यक्रम में राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ ने मारे गए लोगों की स्मृति में फूल चढ़ाए और इस दौरान एक मिनट का मौन रखा गया. इस भीषण भूकंप ने लगभग 75 हज़ार लोगों की जानें ले लीं थीं और हज़ारों अन्य को घायल कर दिया था. पाकिस्तानी कश्मीर में ही 73 हज़ार से ज़्यादा लोगों की जानें गईं थी. अनुमान लगाया गया कि कोई चालीस लाख लोग इससे बेघर-बार हुए थे. लेकिन एक साल बीत जाने के बाद भी लोग मदद के इंतज़ार में बैठे हुए हैं. सरकार ने जो सहायता राशि दी है वह मकान बनाने के लिए पर्याप्त नहीं थी. पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर में भूकंप से तबाह हुए लगभग छह हज़ार स्कूल अब भी तबाह पड़े हैं. उधर पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में भूकंप के प्रभावित लोगों में से लगभग एक हज़ार ने प्रदर्शन किया है. उन्होंने पाकिस्तान सरकार पर राहत राशि में घपला करने और बेघर हुए लोगों को मुआवज़ा न देने का आरोप लगाया. मुज़फ़्फ़राबाद मुज़फ़्फ़राबाद पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर का वह इलाक़ा है जहाँ भूकंप ने सबसे ज़्यादा तबाही मचाई थी.
पाकिस्तान के राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ और प्रधानमंत्री शौकत अज़ीज़ रविवार का दिन मुज़फ़्फ़राबाद में ही भूकंप पीड़ितों के बीच बिताएँगे. बीबीसी संवाददाता ज़ुल्फ़िकार अली के मुताबिक़ सुबह 8.51 मिनट पर एक मिनट का मौन रखा गया. इस दौरान यातायात भी रोक दिया गया. इसके बाद भूकंप पीड़ितों की याद में बनने वाले एक स्मारक की नींव रखी जाएगी. संवाददाता के अनुसार बीते एक साल में लोगों को सरकार की ओर से सहायता तो दी गई है लेकिन वह पर्याप्त नहीं है. पहाड़ी इलाक़े ऐसे हैं कि वहाँ तेज़ी से पुनर्निर्माण हो नहीं सकता और इसलिए निर्माण की गति बेहद सुस्त नज़र आती है. शहरी इलाक़ों में सहायता अब पहुँचनी शुरु हुई है और वहाँ मकान आदि बनने का कार्य अब शुरु होगा. चूंकि ठंड के दिन शुरु हो चुके हैं इसलिए लगता नहीं कि अब लोग कुछ बना पाएँगे. लिहाज़ा 25-30 प्रतिशत से ज़्यादा के पास अपनी कोई छत नहीं होगी और वे अगले साल ही कुछ बना पाएँगे. बालाकोट पाकिस्तान का सूबा सरहद वो इलाक़ा था जहाँ भूकंप ने भारी नुक़सान पहुँचाया था. वहाँ कोई 22 हज़ार लोग मारे गए थे और 40 हज़ार घायल हुए थे.
इस इलाक़े में साढ़ें पाँच लाख लोग बेघर हुए थे. इसी इलाक़े का बालाकोट तो पूरी तरह ज़मींदोज़ हो गया था और पूरा शहर एक तरह से क़ब्रिस्तान में तब्दील हो गया था. बीबीसी संवाददाता शफ़ी नकी जामी वहाँ पहुँचे तो लोगों ने बताया कि उनको अभी तक कोई सहायता नहीं मिली है. लोगों ने कहा कि भूकंप ने उनके रहने के ठिकाने नष्ट कर दिए और सरकार ने जो कुछ दिया वह नुक़सान की तुलना में कुछ भी नहीं था. एक व्यक्ति ने बीबीसी को बताया कि सच यह है कि भूकंप के बाद से लोग मदद का इंतज़ार ज़्यादा करते रह गए और अपने प्रयास कम किए. उनका कहना था कि अब लगता है कि ख़ुद ही कुछ करना होगा. भारतीय कश्मीर भारत प्रशासित कश्मीर में बीते साल आठ अक्तूबर को सुबह 9.15 बजे भूकंप के तगड़े झटके आए थे.
नियंत्रण रेखा से लगे इलाक़ों में 950 लोगों मारे गए थे. एक लाख 85 हज़ार मकानों को नुक़सान पहुँचा था और 24 हज़ार मकान तो पूरी तरह से नष्ट हो गए थे. आज भारत के गृहमंत्री शिवराज पाटिल वहाँ पहुँच रहे हैं. वे श्रीनगर से तंगधार जाएँगे और वहाँ भूकंप पीड़ितों से मिलेंगे. श्रीनगर में रेडक्रॉस सोसायटी भूकंप पीड़ितों के चित्रों की एक प्रदर्शनी आयोजित कर रहा है. भारत प्रशासित राज्य जम्मू और कश्मीर के मुख्यमंत्री ग़ुलाम नबी आज़ाद इसका उद्घाटन करेंगे. भूकंप प्रभावित इलाक़ों का दौरा करने के बाद बीबीसी संवाददाता अनीश अहलूवालिया ने ख़बर दी है कि उड़ी और तंगधार के इलाक़ों में तो पुनर्निर्माण का काम काफ़ी कुछ हो गया दिखता है लेकिन बाक़ी इलाक़ों में अब भी लोग शिकायत कर रहे हैं. ऐसे ही एक इलाक़े के व्यक्ति ने बीबीसी को बताया कि सरकार 40 हज़ार रुपए दे रही है लेकिन इससे तो ईँट और गारा ही आता है बाक़ी मकान कैसे बनेगा. लेकिन सरकार का कहना है कि सरकार ने किश्तों में पैसा देने का वादा किया था और वह पूरा किया जा रहा है. |
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