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भूकंप सहायता राशि चरमपंथियों के हाथों में | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
पाकिस्तान में 2005 में आए विनाशकारी भूकंप के बाद राहत के लिए संयुक्त राष्ट्र से मिली राशि का कुछ हिस्सा ऐसे संगठनों के ज़रिए खर्च किया गया जो वहां के चरमपंथी जिहादी गुटों से संबंधित हैं. पिछले वर्ष अक्तूबर में आए इस जलजले ने ज़्यादातर तबाही पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर में मचाई थी. इसमें करीब 79 हज़ार लोग मारे गए थे,11 हज़ार बच्चे अनाथ हो गए थे और 20 लाख लोग बेघर हो गए. बीबीसी ने जाँच के दौरान पाया है कि चरमपंथियों से संबंध रखने वाला एक समाजसेवी संगठन अब भूकंप में अनाथ हुए बच्चों तक पहुँच बनाने की कोशिश कर रहा है. भूकंप के बाद कई ग़ैर सरकारी संगठन और इस्लामिक समूह मदद को आगे आए और इनमें से कुछ चरमपंथी पृष्ठभूमि के भी थे. अल राशिद इनमें से एक अल-राशिद ट्रस्ट भी था जिसके तार अल क़ायदा से जुड़े होने के चलते सुरक्षा परिषद ने इस पर प्रतिबंध भी लगा रखा है. यह ट्रस्ट पाकिस्तान की अपनी आतंकवादी निगरानी सूची में भी है. इसके बावजूद संयुक्त राष्ट्र ने अल-राशिद नियंत्रित राहत शिविरों को तंबू, ट्रक, दवाइयाँ, कंबल और स्कूल उपलब्ध करवाए. यूएन एजेंसियों ने जमात उद दावा के साथ भी काम किया जिसके बारे में अमरीकी गृह विभाग का दावा है कि इसका आतंकवादी संगठन लश्करे तैबा से नजदीकी संबंध हैं.
इस्लामाबाद में अमरीकी दूतावास के राजनीतिक सलाहकार लैरी रॉबिन्सन के मुताबिक 11 सितंबर के आतंकवादी हमलों के बाद अल क़ायदा के एक बड़े आर्थिक सहयोगी के रूप में इसकी पहचान की गई थी और इसपर आधिकारिक रूप से प्रतिबंध भी लगाया गया था. उनके मुताबिक यह संबंध ऐसा ही है जैसा कि उत्तरी आयरलैंड में सिन फेन के आयरिश रिपबल्किन आर्मी यानी आईआरए के साथ थे. जमात उद दावा जमात उद दवा ने ऐसे पुस्तक भी प्रकाशित किए हैं जिनमें जिहाद और हिंदुओं, यहूदियों, और पश्चिमी राहत एजेंसियों पर हमलों की प्रशंसा की गई है. यूनीसेफ की मदद से चल रहे एक स्कूल में ऐसे गाने गवाए जा रहे हैं जिनमें दूसरे धर्म के लोगों के धर्मांतरण या इनकार किए जाने पर उन्हें ख़त्म कर देने की बात तक कही गई है. अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों के पैसों पर राहत कार्यों के ज़रिये इन संगठनों ने स्थानीय लोगों के बीच अपनी पकड़ मजबूत बना ली है. जमात के एक नेता ने बताया कि नौ वर्ष से कम उम्र के 400 अनाथ बच्चों को अपने घर से हज़ारों मील दूर के मदरसों में भेजा जा चुका है. यह पाकिस्तान सरकार के उन वादों की पोल खोलती है कि इन बच्चों की देखभाल या तो उनके रिश्तेदार या पाकिस्तानी सरकार खुद या दूसरी एजेंसियां करेंगी. पाकिस्तानी सरकार ने भूकंप के बाद राहत कार्य चलाने के लिए इन संगठनों की तारीफ़ भी की थी. इधर संयुक्त राष्ट्र मानवीय राहत कार्यों के संयोजक जेन वंडेमूर्टेले ने बीबीसी के साथ बातचीत में इससे इनकार किया कि वे ऐसे संगठनों के साथ कार्य करते रहे हैं. उन्होंने कहा, "नहीं, हमने उनके साथ कभी काम नहीं किया. जो कैंप वो चला रहे थे, वहाँ हम सक्रिय थे क्योंकि वहाँ रह रहे लोगों को मदद की दरकार थी." | इससे जुड़ी ख़बरें 'लाखों भूकंप पीड़ित अभी भी तंबुओं में'04 अक्तूबर, 2006 | भारत और पड़ोस पाकिस्तान के लिए नई पुनर्निर्माण योजना20 मई, 2006 | भारत और पड़ोस अभी भी बच्चों में भूकंप का ख़ौफ़02 मई, 2006 | भारत और पड़ोस संयुक्त राष्ट्र कर्मचारियों को हिदायत28 जनवरी, 2006 | भारत और पड़ोस तीन महीने बाद भी भूकंप प्रभावित बेहाल08 जनवरी, 2006 | भारत और पड़ोस 'कश्मीर में और भूकंप आ सकते हैं'06 जनवरी, 2006 | भारत और पड़ोस भूकंप पीड़ितों को अब झीलों से ख़तरा07 दिसंबर, 2005 | भारत और पड़ोस पाकिस्तान को उम्मीद से ज़्यादा राशि19 नवंबर, 2005 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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