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'नष्ट हुए हज़ारों स्कूल अब भी वैसे ही' | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर में आए भूकंप के एक साल पूरे होने के बाद भी भूकंप से प्रभावित हुए लगभग छह हज़ार स्कूल अब भी तबाह पड़े हैं. हालाँकि, बच्चों को खुले आसमान के नीचे या फिर तँबुओं में पढ़ाया जा रहा है. एक साल पहले आए भूकंप में न केवल छह हज़ार स्कूल नष्ट हो गए थे बल्कि 18 हज़ार बच्चे भी मलबे के नीचे दबकर मारे गए थे. पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर में भूकंप से मरने वालों की संख्या 73 हज़ार से ज़्यादा थी. उधर पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में भूकंप के प्रभावित लोगों में से लगभग एक हज़ार ने प्रदर्शन किया है. उन्होंने पाकिस्तानी सरकार पर राहत राशि में घपला करने और बेघर हुए लोगों को मुआवज़ा न देने का आरोप लगाया. एक प्रभावित गाँव पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर के उत्तर में स्थित बाडियारा गाँव भी भूकंप से बुरी तरह प्रभावित हुआ. वहाँ दो हज़ार लोग रहते हैं जिनमें से 50 भूकंप वाले दिन मारे गए थे. इनमें से 49 बच्चे थे. उस दिन को याद करते हुए एक प्रभावित व्यक्ति ने बताया, "जब हम स्कूल पहुँचे तो मैने देखा कि मेरे दोनो भाई मलबे में पड़े हुए थे और उनका सिरों के टुकड़े-टुकड़े हो गए थे. मुझे लगा जैसे मेरे दिल का एक भाग मैने सदा के लिए खो दिया." बच्चे बताते हैं कि वे दोबारा स्कूल में जाने से डरते थे लेकिन शिक्षकों के प्रोत्साहन के बाद उन्होंने स्कूल जाना शुरु कर दिया. बाडियारा गाँव में कुछ लोगों ने अपने घर बनाने शुरु कर दिए हैं और उनकी स्कूल भी दोबारा बनाने की योजना है. |
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