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भूकंप की बरसी पर मदद का इंतज़ार | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
पाकिस्तान, पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर और भारत प्रशासित कश्मीर के कई इलाक़ों में आए भूकंप की पहली बरसी पर मृतकों को श्रद्धांजलि दी जा रही है. पिछले साल आठ अक्तूबर को आए विनाशकारी भूकंप में 75 हज़ार से ज़्यादा लोग मारे गए थे और लाखों लोग बेघर हो गए थे. पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर की राजधानी मुज़फ़्फ़राबाद में हुई श्रद्धांजलि सभा में पाकिस्तान के राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ भी शामिल हुए. श्रद्धांजलि सभा में एक मिनट का मौन रखा गया और पीड़ितों के लिए प्रार्थना की गई. राष्ट्रपति मुशर्रफ़ ने मारे गए लोगों की याद में बने स्मारक पर फूल चढ़ाए. परवेज़ मुशर्रफ़ का वादा उन्होंने वादा किया कि ज़्यादातर पुनर्निर्माण कार्य तीन साल के अंदर पूरा कर लिया जाएगा. उन्होंने यह भी भरोसा दिलाया कि पुनर्निर्माण कार्यों में लगे भ्रष्टाचार के आरोपों से कड़ाई से निपटा जाएगा.
शनिवार को ही पुनर्निर्माण कार्यों की धीमी गति और सहायता राशि सही लोगों तक न पहुँच पाने को लेकर भूकंप प्रभावितों ने विरोध प्रदर्शन किया था. राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ ने कहा कि पाकिस्तान इस भूकंप की विनाशलीला से उबरने की राह पर है. उन्होंने कहा, "हेलिकॉप्टर से आते समय मैं भूकंप से हुए विनाश के चिन्ह ढूँढ़ रहा था. लेकिन मुझे ख़ुशी है कि ऐसे कोई निशान मुझे नहीं मिले. मैं उन लोगों को बधाई देना चाहता हूँ जिन्होंने इस दिशा में सहायता कार्य किया है." लेकिन बीबीसी संवाददाता बारबारा प्लेट का कहना है कि राष्ट्रपति मुशर्रफ़ की बातों से काफ़ी लोग सहमत नहीं. यह ज़रूर है कि भूकंप के बाद मलबों को हटा दिया गया है लेकिन कई इलाक़ों में पुनर्निर्माण कार्य अभी तक शुरू नहीं हुआ है.
बीबीसी संवाददाता के अनुसार ज़्यादार पीड़ित लोग अस्थायी घरों में रहने को मजबूर हैं. इन्हीं लोगों में से एक हैं आरफ़ा महमूद. आरफ़ा कहती हैं, "आप मेरे कैंप में आइए और देखिए कि किस हालात में हम लोग रह रहे हैं. क्या हमारे राष्ट्रपति इस कैंप में रह सकते हैं? क्या वे इसकी कल्पना कर सकते हैं?" पीड़ित परिवारों का आरोप है कि मुआवज़े की राशि भी नौकरशाही के चक्कर में उनके पास नहीं पहुँच पाई है. दूसरी ओर सरकारी अधिकारियों का कहना है कि जिस स्तर पर भूकंप आया था, उसे देखते हुए पुनर्निर्माण कार्यों में समय तो लगेगा हीं. बीबीसी संवाददाता का कहना है कि अस्थायी घरों में रहने को मजबूर लोग आने वाली ठंड को लेकर अभी से ठिठुरने लगे हैं और उनकी नाराज़गी बढ़ती जा रही है. मुज़फ़्फ़राबाद मुज़फ़्फ़राबाद पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर का वह इलाक़ा है जहाँ भूकंप ने सबसे ज़्यादा तबाही मचाई थी.
बीबीसी संवाददाता ज़ुल्फ़िकार अली के मुताबिक़ सुबह 8.51 मिनट पर एक मिनट का मौन रखा गया. इस दौरान यातायात भी रोक दिया गया. संवाददाता के अनुसार बीते एक साल में लोगों को सरकार की ओर से सहायता तो दी गई है लेकिन वह पर्याप्त नहीं है. पहाड़ी इलाक़े ऐसे हैं कि वहाँ तेज़ी से पुनर्निर्माण हो नहीं सकता और इसलिए निर्माण की गति बेहद सुस्त नज़र आती है. शहरी इलाक़ों में सहायता अब पहुँचनी शुरु हुई है और वहाँ मकान आदि बनने का कार्य अब शुरु होगा. चूंकि ठंड के दिन शुरु हो चुके हैं इसलिए लगता नहीं कि अब लोग कुछ बना पाएँगे. लिहाज़ा 25-30 प्रतिशत से ज़्यादा के पास अपनी कोई छत नहीं होगी और वे अगले साल ही कुछ बना पाएँगे. बालाकोट पाकिस्तान का सूबा सरहद वो इलाक़ा था जहाँ भूकंप ने भारी नुक़सान पहुँचाया था. वहाँ कोई 22 हज़ार लोग मारे गए थे और 40 हज़ार घायल हुए थे.
इस इलाक़े में साढ़ें पाँच लाख लोग बेघर हुए थे. इसी इलाक़े का बालाकोट तो पूरी तरह ज़मींदोज़ हो गया था और पूरा शहर एक तरह से क़ब्रिस्तान में तब्दील हो गया था. बीबीसी संवाददाता शफ़ी नकी जामी वहाँ पहुँचे तो लोगों ने बताया कि उनको अभी तक कोई सहायता नहीं मिली है. लोगों ने कहा कि भूकंप ने उनके रहने के ठिकाने नष्ट कर दिए और सरकार ने जो कुछ दिया वह नुक़सान की तुलना में कुछ भी नहीं था. एक व्यक्ति ने बीबीसी को बताया कि सच यह है कि भूकंप के बाद से लोग मदद का इंतज़ार ज़्यादा करते रह गए और अपने प्रयास कम किए. उनका कहना था कि अब लगता है कि ख़ुद ही कुछ करना होगा. भारतीय कश्मीर भारत प्रशासित कश्मीर में बीते साल आठ अक्तूबर को सुबह 9.15 बजे भूकंप के तगड़े झटके आए थे.
नियंत्रण रेखा से लगे इलाक़ों में 950 लोगों मारे गए थे. एक लाख 85 हज़ार मकानों को नुक़सान पहुँचा था और 24 हज़ार मकान तो पूरी तरह से नष्ट हो गए थे. भारत के गृहमंत्री शिवराज पाटिल ने इन इलाक़ों का दौरा किया. वे भूकंप प्रभावित तंगधार गए और वहाँ भूकंप पीड़ितों से मिले. भूकंप प्रभावित इलाक़ों का दौरा करने के बाद बीबीसी संवाददाता अनीश अहलूवालिया ने ख़बर दी है कि उड़ी और तंगधार के इलाक़ों में तो पुनर्निर्माण का काम काफ़ी कुछ हो गया दिखता है लेकिन बाक़ी इलाक़ों में अब भी लोग शिकायत कर रहे हैं. ऐसे ही एक इलाक़े के व्यक्ति ने बीबीसी को बताया कि सरकार 40 हज़ार रुपए दे रही है लेकिन इससे तो ईँट और गारा ही आता है बाक़ी मकान कैसे बनेगा. लेकिन सरकार का कहना है कि सरकार ने किश्तों में पैसा देने का वादा किया था और वह पूरा किया जा रहा है. |
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