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सोमवार, 09 जनवरी, 2006 को 12:25 GMT तक के समाचार
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भ्रष्ट सांसदों के मामले में संसद को नोटिस
कैमरे में क़ैद सांसद
सासंदों का कहना था कि उन्हें प्राकृतिक न्याय प्रक्रिया के तहत सफ़ाई का मौक़ा नहीं दिया गया
संसद में प्रश्न पूछने के लिए पैसे लेते कैमरे पर पकड़े गए 11 सांसदों की बर्खास्तगी के मामले में दिल्ली हाईकोर्ट ने राज्यसभा, लोकसभा और केंद्र सरकार को नोटिस दिया है.

लोकसभा सचिवालय की ओर से कहा गया है कि संसद की ओर से इसका कोई जवाब नहीं दिया जाएगा.

उल्लेखनीय है कि 2005 दिसंबर में एक टेलीविज़न चैनल ने विभिन्न दलों के 11 सांसदों को घूस लेते हुए कैमरे पर क़ैद किया था इसके बाद दोनों सदनों से इन सांसदों को बर्खास्त कर दिया गया था.

इन बर्खास्त सांसदों में से 9 ने दिल्ली हाईकोर्ट का दरवाज़ा खटखटाया है. इनमें छह सांसद भाजपा के हैं, एक आरजेडी के, एक बीएसपी के और एक कांग्रेस के.

याचिकाकर्ता सांसदों का कहना है कि उन्हें संसद से ग़लत ढंग से बर्खास्त किया गया है क्योंकि जिस समिति ने इस मामले की जाँच की है उसे कोई संवैधानिक अधिकार नहीं है.

मामले की सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से वकील ने कहा कि संविधान की धारा 22 के तहत इस मामले की सुनवाई न्यायालय के अधिकार क्षेत्र में नहीं है.

अदालत ने इस मामले में राज्यसभा, लोकसभा और केंद्र सरकार को नोटिस भेजा है.

जवाब नहीं

संसद की ओर से लोकसभा सचिवालय ने कहा है कि वो इस नोटिस का जवाब नहीं देने जा रहे हैं.

सोमनाथ चटर्जी
सोमनाथ चटर्जी का कहना है कि सांसदों के अनुशासन पर फ़ैसला करने का अधिकार संसद का है

हालांकि लोकसभा अध्यक्ष सोमनाथ चटर्जी ने सोमवार को इस नोटिस पर कोई औपचारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है लेकिन वे एक दिन पहले यानी रविवार को ही बीबीसी से हुई बातचीत में स्पष्ट कर चुके हैं कि वे नोटिस का कोई जवाब नहीं देंगे.

सोमनाथ चटर्जी ने इन आरोपों को ख़ारिज कर दिया था कि सांसदों को निष्कासित करने का फ़ैसला जल्दबाज़ी में लिया गया और यह मामला विशेषाधिकार समिति या आचरण समिति को दिया जाना चाहिए था.

लोकसभाध्यक्ष ने कहा था, "मैं किसी को अदालत जाने से रोक तो नहीं सकता लेकिन मैं मानता हूँ कि यह मामला न्यायालय के अधिकार क्षेत्र में नहीं आता और अदालत का कोई आदेश संसद के लिए बाध्यकारी नहीं है."

अदालत के प्रति सम्मान दोहराते हुए उन्होंने कहा था, "यह अनुशासन और आचरण का मामला था और आख़िरकार संसद को तय करना है कि अनुशासनहीनता पर वह अपने सदस्यों के ख़िलाफ़ क्या कार्रवाई करेगी."

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