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गुरुवार, 22 दिसंबर, 2005 को 22:58 GMT तक के समाचार
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सांसदों के निष्कासन की सिफ़ारिश
रामसेवक सिंह, कांग्रेस सांसद (ऑपरेशन दुर्योधन की तस्वीर)
टीवी चैनल ने दिखाया है कि संसद में सवाल पूछने के लिए सांसदों ने पैसे लिए
संसद में सवाल पूछने के लिए कथित तौर पर घूस लेने के मामले की जाँच कर रही कुमार बंसल समिति ने मामले से जुड़े बताए जाने वाले 10 लोकसभा सदस्यों को सदन से निष्कासित करने की सिफ़ारिश की है.

बंसल समिति की रिपोर्ट गुरुवार को लोक सभा में पेश की गई. इस जाँच समिति को लोकसभा अध्यक्ष सोमनाथ चटर्जी ने नियुक्त किया था.

संसद में सवाल पूछने के लिए घूस लेने के कथित मामले में राज्यसभा के एक और लोकसभा के 10 सदस्यों पर आरोप लगा था.

मामले से जुड़े बताए जाने वाले लोकसभा सदस्यों में भाजपा के पाँच, बीएसपी के तीन और कांग्रेस और आरजेडी का एक-एक सांसद शामिल है.

समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार समिति ने अपनी रिपोर्ट में कहा है, "यह कितना भी कठोर लगे लेकिन इन सांसदों का लोकसभा में बने रहना उचित नहीं होगा."

रिपोर्ट में कहा गया है, ''समिति सिफ़ारिश करती है कि सदन इन दस सदस्यों को 14वीं लोकसभा से निष्कासित करने पर विचार करे.''

 यह कितना भी कठोर लगे लेकिन इन सांसदों का लोकसभा में बने रहना उचित नहीं होगा
बंसल समिति की सिफ़ारिश

समिति के अध्यक्ष पवन कुमार बंसल ने बीबीसी से कहा, "मैं इतना ही कहना चाहता हूँ कि हम लोगों की रिपोर्ट संसद में पेश हो गई है. इसके अलावा हमारे लिए और कुछ कहना ठीक नहीं है.''

उनका कहना था, ''सदन अपने आप उसपर चर्चा करके अपना निर्णय लेगा. जब तक सदन में इस पर बहस नहीं हो जाती तब तक हमें इस पर चर्चा नहीं करनी चाहिए.''

लोकसभा अध्यक्ष सोमनाथ चटर्जी ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए इसकी जाँच के लिए एक पाँच सदस्यीय समिति गठित कर दी थी.

इस समिति में पवन कुमार बंसल (कांग्रेस), वीके मल्होत्रा (भाजपा), प्रोफ़ेसर रामगोपाल यादव (समाजवादी पार्टी), मोहम्मद सलीम (सीपीएम) और सी कुप्पसामी (डीएमके) सांसद हैं. पवन बंसल इस समिति के अध्यक्ष हैं.

विरोध

हालांकि समिति के एक सदस्य विजय कुमार मल्होत्रा ने अलग राय व्यक्त करते हुए इसका विरोध किया है.

 मैं बिना उचित प्रक्रिया अपनाए हुए सदन के सदस्यों को निष्कासित करने में भागीदारी नहीं बन सकता हूँ
विजय कुमार मल्होत्रा, समिति के एक सदस्य

उन्होंने अपने विरोध पत्र में कहा है, ''मैं बिना उचित प्रक्रिया अपनाए हुए सदन के सदस्यों को निष्कासित करने में भागीदारी नहीं बन सकता हूँ.''

मल्होत्रा का कहना था कि इस मामले को विशेषाधिकार समिति के हवाले कर दिया जाना चाहिए था.

लोक सभा अध्यक्ष ने जाँच तक इस मामले में फँसे सांसदों के सदन में आने तक रोक लगा दी थी.

दूसरी ओर राज्यसभा के सभापति भैरोंसिंह शेखावत ने इस मामले फंसे राज्यसभा के एक सदस्य का मामला आचरण समिति के हवाले कर दिया था.

मामला

उल्लेखनीय है कि एक टेलीविज़न चैनल ने एक वीडियो टेप का प्रसारण किया था जिसमें विभिन्न राजनीतिक दलों के सांसदों को संसद में प्रश्न पूछने के लिए घूस लेते दिखाया गया था.

इन 11 सांसदों में छह भारतीय जनता पार्टी के, तीन बहुजन समाज पार्टी के, एक-एक सांसद कांग्रेस और राष्ट्रीय जनता दल के हैं.

टीवी चैनल 'आजतक' ने मीडिया कंपनी 'कोबरा पोस्ट' के साथ मिलकर यह ख़ुफ़िया रिकॉर्डिंग की थी.

इसे चैनल ने 'ऑपरेशन दुर्योधन' का नाम दिया था.

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