BBCHindi.com
अँग्रेज़ी- दक्षिण एशिया
उर्दू
बंगाली
नेपाली
तमिल
रविवार, 18 दिसंबर, 2005 को 02:42 GMT तक के समाचार
मित्र को भेजेंकहानी छापें
ऐसे दिया मौत को चकमा
लहरें

पिछले साल जब सूनामी आई, तो उसकी लहरों ने हज़ारों लोगों को निगल लिया. करीब दो लाख लोगों की जान गई लेकिन कुछ लोग ऐसे भी थे जिन्होंने मौत को भी चकमा दे दिया और मौत के चंगुल से बचकर निकल आए.

आइए जानते हैं ऐसे ही कुछ लोगों की दास्तां.


हाथी ने बच्ची को सूनामी से बचाया

हाथी

फ़िल्मों में तो कई बार ऐसे किस्से देखने को मिलते हैं जिसमें वफ़ादार जानवर इंसान की जान बचाता है. लेकिन पिछले साल आई सूनामी में ऐसा एक किस्सा हक़ीक़त में देखने को मिला. आठ साल की ब्रितानी बच्ची एंबर मेसन थाईलैंड के फ़ुकेत में निंगनॉंग नाम के हाथी पर सवार थी कि अचानक लहरें आईं और पानी लोगों के काँधे तक पहुँच गया.
लेकिन हाथी निंगनॉंग फटाफट भागा और लहरों के
बीच एंबर को सुरक्षित जगह पर ले गया.


कुदरत की मेहरबानी

सूनामी प्रभावित बच्चा

भारत के अंडमान निकोबार द्वीप समूह में जिस समय सूनामी की लहरें उठी तो 10 साल का एक बच्चा मुरलीधरन अपने माता-पिता से अलग हो गया. जान बचाने के लिए वो एक पेड़ पर चढ़ गया. दस दिन तक ये बच्चा पेड़ पर ही रहा, बिना कुछ खाए-पिए. बाद में भारतीय सेना के एक दल ने उसे बचाया. इतने दिन बिना खाए-पिए पेड़ पर जिंदा रहना शायद किसी करिश्मे से कम नहीं.


मौत के साथ आँख मिचौली

महिला

जब इंडोनेशिया के आचे प्रांत में सूनामी की लहरें आईं तो मालावती नाम की एक गर्भवती महिला भी इन लहरों में बह गई. मालावती को तैरना भी नहीं आता था कि तैर कर ही किनारे तक पहुँच जाए. किस्मत से उन्हें पेड़ की एक बड़ी सी शाखा मिल गई और उसी पर लटककर वो कुछ दिन जिंदा रही. ख़तरनाक शार्क से बचते बचाते मालावती ने पाँच दिन
समुद्र में बिताए. आख़िरकार उन्हें बचा
लिया गया. इस पूरी अफ़रातफ़री
में मालावती ये उम्मीद छोड़ चुकी थी
कि उसके पेट में पल रहा बच्चा जिंदा
बचा होगा. लेकिन डॉक्टरी जाँच के बाद
पता चला कि सब ठीक है.


द्वीप पर अकेले बिताए 45 दिन...

अंडमान द्वीप

हिंद महासागर में आई सूनामी लहरों के 45 दिन बाद अंडमान-निकोबार के एक द्वीप में अकेली फंसी एक लड़की को पुलिस ने जीवित बचाया था. जब सूनामी की लहरें आईं तो 18 वर्षीय जस्सी जंगल की ओर भाग गई और जंगली फल और नारियल पानी पीकर 45 दिन तक जीवित रहीं. बाद में जब वो द्वीप पर लौटी तो पुलिस जस्सी को बचाने में कामयाब रही.


मौत के ढेर में बची जिंदगी

सूनामी

भारत के अंडमान-निकोबार द्वीप समूह में सूनामी ने ज़बरदस्त कहर बरपाया. माईकल मंगल नाम के व्यक्ति को चार हफ़्ते बाद पिलो पाँजा द्वीप में जीवित पाया गया. वो चार हफ़्ते तक नारियल का पानी पीकर और उसकी गिरी खाकर जीवित रहा. माईकल कपड़ों को एक बाँस पर बाँधकर लहरा रहे थे जब वहाँ से गुज़र रही नौसेना ने उन्हें देखा और बचा लिया. पूरे गाँव में सिर्फ़ यही युवक जिंदा बच पाया.


नारियल खाकर आठ दिन बिताए समुद्र में

इंडोनेशिया में रहने वाले रिज़ाल शाहपुत्र आम दिनों की तरह मस्जिद में अपना काम कर रहे थे कि अचानक सूनामी की लहरें आईं और उसे समुद्र में बहा ले गई. रिज़ाल के साथ उसके कई दोस्त भी थे लेकिन एक एक कर सभी डूब गए. लेकिन रिज़ाल आठ दिन तक समुद्र के बीच पेड़ों की टहनियों के सहारे बचे रहे. रिज़ाल को एक समुद्री जहाज़ पर सवार लोगों ने बचाया.

इससे जुड़ी ख़बरें
विश्व रिकार्ड ने बचाई हज़ारों की जान
16 फ़रवरी, 2005 | भारत और पड़ोस
डीएनए से चला पता असली माँ-बाप का
14 फ़रवरी, 2005 | भारत और पड़ोस
मौत के मुँह से बचे नौ निकोबारी
02 फ़रवरी, 2005 | भारत और पड़ोस
गंगासागर:सूनामी पर आस्था की जीत
16 जनवरी, 2005 | भारत और पड़ोस
सूनामी से हुए अनाथों की हालत
08 जनवरी, 2005 | भारत और पड़ोस
कैसे बचीं अंडमान की जनजातियाँ?
04 जनवरी, 2005 | भारत और पड़ोस
इंटरनेट लिंक्स
बीबीसी बाहरी वेबसाइट की विषय सामग्री के लिए ज़िम्मेदार नहीं है.
सुर्ख़ियो में
मित्र को भेजेंकहानी छापें
मौसम|हम कौन हैं|हमारा पता|गोपनीयता|मदद चाहिए
BBC Copyright Logo^^ वापस ऊपर चलें
पहला पन्ना|भारत और पड़ोस|खेल की दुनिया|मनोरंजन एक्सप्रेस|आपकी राय|कुछ और जानिए
BBC News >> | BBC Sport >> | BBC Weather >> | BBC World Service >> | BBC Languages >>