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मौत के मुँह से बचे नौ निकोबारी | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
कहते हैं कि मौत का शिकंजा बहुत मज़बूत होता है और इससे बच निकलना नामुमकिन होता है लेकिन कभी-कभी ऐसा भी होता है कि ज़िंदगी इस शिकंजे को ढीला कर देती है. बिल्कुल ऐसा ही हुआ है सूनामी लहरों से हुई तबाही के पाँच हफ़्ते बाद जब अंडमान-निकोबार द्वीप समूह में एक दूरदराज़ के एक द्वीप से नौ लोगों को बचा लिया गया. पुलिस का कहना है कि सारे लोग निकोबार के एक जनजाति के हैं. पुलिस अधिकारी बीबी चौधरी ने बीबीसी को बताया कि वे एक खोजी दल के साथ समुद्री जहाज़ पर निकोबार के द्वीपों से गुज़र रहे थे. वे समुद्र में भारत के सबसे दूरदराज़ स्थित इंदिरा प्वाइंट पर पहुँचे जो सूनामी लहरों में पूरी तरह से डूब गया था. जब वे पिल्लो भाबी द्वीप के निकट पहुँचे तो उन्होंने पाया कि कुछ लोग हाथ हिलाकर उनका ध्यान आकर्षित करने की कोशिश कर रहे थे. जब वे और अपने सहयोगियों के साथ द्वीप पर पहुँचे तो उन्होंने वहाँ पाँच आदमी, एक स्त्री और तीन बच्चियों को पाया. पुलिस का कहना है कि उस द्वीप पर 150 लोग थे लेकिन केवल नौ लोग ही बच सके. बचे हुए लोगों ने बताया कि सूनामी लहरों ने उन्हें समुद्र में फेंक दिया और दो दिन के बाद उन्हें वापस समुद्र तट पटक दिया. ये लोग केवल नारियल का पानी पीकर जीवित रहे. अब इन लोगों का इलाज चल रहा है. |
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