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बच्चे ने मौत को चकमा दिया | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
यह बिल्कुल क़ुदरत की मेहरबानी की घटना है. 26 दिसंबर को हिंद महासागर में आए भूकंप और उससे उपजी सूनामी लहरों की तबाही का शिकार डेढ़ लाख से ज़्यादा लोग तो हुए हैं, वहीं कुछ ऐसे भी मामले सामने आए हैं जिनमें बच्चों, लोगों की जान बचना किसी करिश्मे से कम नज़र नहीं आता. ऐसी ही एक घटना में भारत के अंडमान निकोबार में सामने आई है जिसमें एक बच्चा दस दिन तक एक पेड़ पर चढ़ा रहा और बिना कुछ खाए-पिए जीवित भी रहा. यह बच्चा है दस साल का मुरली धरन. मुरली धरन ने बताया, "भूकंप के बाद पानी बहुत ताक़त से आया. हमने भागना शुरू कर दिया." "उस समुद्री तूफ़ान ने मुझे अपने माता-पिता से अलग कर दिया. मैं एक पेड़ पर चढ़ गया और दस दिन तक वहीं चढ़ा रहा. मैंने कुछ भी नहीं खाया." इस तरह यह लड़का दस दिन तक बिना कुछ खाए-पिये, पेड़ पर बैठा रहा और क़ुदरत ने उसे जीवित रखा. बुधवार को वह पेड़ से नीचे गिर गया लेकिन वहाँ भी पानी था. बाद में जब उसे होश आया तो वह भारतीय सेना के राहत दल की तरफ़ भागा जो उसे पोर्ट ब्लेयर ले आया. डॉक्टरों ने मुरली धरन को सलाह दी है कि वह अभी आहिस्ता-आहिस्ता खाए. वैसे मुरली धरन फिलहाल ठीकठाक है. |
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