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राहत सहायता पर्याप्त: भारत सरकार | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत सरकार का कहना है कि देश में सूनामी प्रभावितों के लिए राहत एवं बचाव कार्य का पहला चरण पूरा हो गया है और अब दूसरे चरण का वक्त आ गया है. विदेश सचिव श्याम सरण ने संवाददाताओं से बातचीत में कहा," पहले चरण में हमने वो कार्य किए जो तत्काल किए जाने चाहिए थे. अब हम दीर्घावधि की योजनाओं पर ध्यान दे रहे हैं. पुनर्वास पर ध्यान दिया जा रहा है ताकि लोगों का जीवन सामान्य किया जा सके." भारत का तमिलनाडु राज्य और अंडमान निकोबार द्वीप समूह सूनामी से बुरी तरह प्रभावित हुए हैं लेकिन इसके बावजूद भारत ने दूसरे प्रभावित देशों की मदद की है. भारत ने इस बार किसी तरह की राहत सहायता से भी यह कहते हुए इंकार किया कि भारत इस आपदा से खुद निपट सकता है. भारत ने 100 करोड़ की मदद भी की है. प्रतिरक्षा मंत्रालय ने इस संबंध में और जानकारी दी. मंत्रालय के प्रवक्ता एडमिरल आर पुरी ने बताया कि भारतीय सेना ने शांतिकाल का सबसे बड़ा सैनिक अभियान सूनामी के बाद ही शुरु किया. इसके तहत चार अभियान शुरु किए गए जिनमें से तीन श्रीलंका, मालदीव और इंडोनेशिया के लिए थे. इसमें हज़ारों सैनिकों और विमानों ने हिस्सा लिया. एडमिरल पुरी के अनुसर भारत ने 8300 सैनिकों, 31 जहाज़, 22 हेलीकॉप्टर और 5000 अन्य लोगों की मदद से श्रीलंका और मालदीव के लिए राहत कार्य किया. विदेश सचिव सरन ने कहा कि विदेशी सहायता स्वीकार नहीं करने का भारत का फैसला सही था. जानकारों का मानना है कि भारत ने इस आपदा की स्थिति में यह दिखाने की कोशिश की है कि महाशक्ति होने का उसका दावा कितना सही है. राहत कार्य की दृष्टि से देखा जाए तो भारत में सभी जगह राहत पहुंच रही है लेकिन बांटने में समस्या हो रही है. जानकारों के अनुसार ये ज़मीनी स्थिति की समस्या है इस तरह के संकट में किसी तरह की महामारी नहीं फैलने को भी सरकार की सफलता के रुप में देखा जा रहा है. भारत के प्रभावित इलाक़ों में ऐसी समस्या नहीं हुई है. |
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