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सोमवार, 03 जनवरी, 2005 को 02:06 GMT तक के समाचार
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तकनीकी उपकरणों की कमी: सिब्बल
कपिल सिब्बल
कपिल सिब्बल ने ये भी माना कि उनके मंत्रालय के ही कुछ विभागों में समन्वय में कमी है
भारत के विज्ञान-प्रौद्योगिकी और समुद्री विकास मंत्री कपिल सिब्बल ने माना है कि देश में आपदा प्रबंधन से जुड़े तकनीकी उपकरणों की कमी है और विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्रालय के कुछ हिस्सों में ही समन्वय की दिक़्क़त है.

आपकी बात बीबीसी के साथ कार्यक्रम में हिस्सा लेते हुए सिब्बल ने ये भी स्वीकार किया कि आपदा प्रबंधन को इन स्थितियों से निबटने के लिए और कुशल बनाने की ज़रूरत है.

सिब्बल के अनुसार इस मामले में निर्णय की प्रक्रिया प्रशासनिक हाथों से निकालकर पेशेवर हाथों में देनी होगी. उनका कहना था कि वैज्ञानिकों को इस मामले में अधिक स्वतंत्रता देनी होगी जो जानते हैं कि क्या हो सकता है और उससे कैसे निबटना है.

प्रशांत महासागर में सूनामी से जुड़ी चेतावनी देने वाली संधि पर हस्ताक्षर करने वाले 26 देशों में भारत के शामिल नहीं होने को लेकर सिब्बल का स्पष्ट कहना था कि इसकी कोई ज़रूरत नहीं है क्योंकि वह संधि प्रशांत महासागर से जुड़ी है न कि हिंद महासागर और बंगाल की खाड़ी से.

वैसे विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्री ने कहा है कि सरकार सूनामी की चेतावनी देने वाली 125 करोड़ रुपए की लागत से लगने वाली प्रणाली लेने जा रही है जिससे भविष्य में सही चेतावनी मिल सकेगी.

उन्होंने कहा कि इसमें दो से ढाई वर्ष तक का समय लग सकता है.

'पहले जानना मुश्किल'

इस सूनामी की चेतावनी देने में विफल रहने के बारे में सिब्बल का कहना था कि भारत में पिछली बार 1883 में सूनामी आया था और रिक्टर पैमाने पर साढ़े सात से अधिक का भूकंप आने पर ही सूनामी पैदा होता है.

 सरकार सूनामी की चेतावनी देने वाली 125 करोड़ रुपए की लागत से लगने वाली प्रणाली लेने जा रही है जिससे भविष्य में सही चेतावनी मिल सकेगी
कपिल सिब्बल, विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्री

उन्होंने कहा कि इसका पता लगाना मुश्किल होता है कि क्योंकि अगर सूनामी समुद्र तल के नीचे बन रहा हो तो ऊपर तो इसका पता भी नहीं लगता.

विज्ञान के मामले में सरकार की ओर से होने वाले अधिकतर ख़र्च के रक्षा क्षेत्र में जाने के बारे में सिब्बल का कहना था कि देश के सामने नियोजन से जुड़ी प्राथमिकताएँ तय करने की परेशानियाँ रहती हैं.

उन्होंने कहा कि अगर एक विभाग कह दे कि देश को दूसरे देश से ख़तरा है तो रक्षा का ख़र्च बढ़ जाता है और दूसरे क्षेत्रों की ज़रूरत को कम करके आँका जाता है.

विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्री के अनुसार इस स्थिति को बदलने की ज़रूरत है और विज्ञान को आम लोगों की सुरक्षा में लगाने की ज़रूरत होगी.

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