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भारत का आख़िरी सक्रिय ज्वालामुखी फटा | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत का आख़िरी सक्रिय ज्वालामुखी भी 26 दिसंबर को आई सूनामी लहरों के प्रभाव में फट पड़ा है. अधिकारियों का कहना है कि देश के पूर्वी हिस्से में स्थित अंडमान व निकोबार द्वीप समूह में इस ज्वालामुखी के मुँह से लावा निकल रहा है. इसका मुँह समुद्र की सतह से काफ़ी ऊँचाई पर है. लेकिन भारत के भूगर्भ सर्वेक्षण विभाग ने कहा है कि इससे चिंता की कोई बात नहीं है. ज्वालामुखी के निकट के एक गाँव डिगलीपुर के निवासियों ने 26 दिसंबर को आए समुद्री भूकंप और सुनामी लहरों के बाद इस ज्वालामुखी के मुँह से धुआँ और आग की लपटें निकलती देखीं. अंडमान व निकोबार द्वीप समुह के प्रशासन का कहना है कि इस ख़बर के बाद तुरंत राष्ट्रीय दूरसंवेदी एजेंसी की सेवाएँ ली गईं जो तुरंत हरकत में भी आ गई. भारतीय भूगर्भ सर्वेक्षण विभाग के अधिकारियों ने अब कहा है कि वास्तव में ज्वालामुखी के मुँह से लावा निकला है लेकिन उन्होंने यह भी कहा कि इससे चिंता की कोई बात नहीं है. ख़ामोश ज्वालामुखी अंडमान व निकाबार द्वीप समुह में भूगर्भ सर्वेक्षण विभाग के प्रमुख एमएम मुखर्जी ने पत्रकारों को बताया कि यह ज्वालामुखी समुद्र से घिरा हुआ है इसलिए इससे निकलने वाला तमाम लावा समुद्र में ही बह जाएगा.
यह ज्वालामुखी पिछले दशक में तीन बार 1991, 1994 और 1996 में फटा था और तब से यह ख़ामोश ही रहा है. मुखर्जी ने इस संभावना से इनकार नहीं किया कि उस क्षेत्र में सक्रिय अन्य ज्वालामुखियों से भी लावा निकल सकता है. बरातंग द्वीप में एक ज्वालामुखी के भी फटने की ख़बरें हैं जिसके बाद वहाँ के निवासियों को सुरक्षित स्थानों पर भेजा गया. इस क्षेत्र का कत्चाल द्वीप सुनामी लहरों में डूब गया और वहाँ से सिर्फ़ 50 लोगों को ही बचाया जा सका. वहाँ के क़रीब तीन हज़ार लोग लापता हैं. प्रशासन का कहना है कि अंडमान व निकोबार द्वीप समुह में अभी सिर्फ़ 800 शव ही बरामद किए गए हैं और 5000 लोग लापता हैं. ग़ैर आधिकारिक सूत्रों का कहना है कि मृतकों की संख्या दस हज़ार से ज़्यादा हो सकती है. पहले स्थानीय पुलिस ने भी ऐसा ही कहा था लेकिन बाद में मृतकों की संख्या कम करके बताई थी. |
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