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'मूँगा चट्टानों को भारी नुक़सान' | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
हिंद महासागर में 26 को आए भूकंप और उसके बाद उठी भयंकर सूनामी लहरों से हुई तबाही में अंडमान निकोबार द्वीप समूह की मूँगे की ख़ूबसूरत चट्टानों को भी ख़तरा पैदा हो गया है. भारतीय प्राणि विज्ञान सर्वेक्षण के क्षेत्रीय निदेशक डीआरके शास्त्री का कहना है, "हमें आशंका है कि मूँगे की चट्टानों को सूनामी गंभीर नुक़सान हुआ है." "मूँगे की चट्टानों को तो तेज़ हवाएँ और ताक़तवर लहरें भी नुक़सान पहुँचा सकती हैं इसलिए सूनामी लहरों से तो इन चट्टानों को बड़े नुक़सान की आशंका है. शास्त्री का कहना था, "हम स्थिति सामान्य होने की प्रतीक्षा कर रहे हैं, उसके बाद हम नुक़सान के आकलन के लिए सर्वे करेंगे." उन्होंने कहा, "अंडमान निकोबार द्वीप समूह की मूँगा चट्टानें अपनी विविधता में बेमिसाल हैं. इसके मुक़ाबले में पहले नंबर पर सिर्फ़ ऑस्ट्रेलिया की ग्रेट बैरियर मूँगा चट्टानें आती हैं." शास्त्री ने कहा कि मूँगे की चट्टानें बहुत नाज़ुक होती हैं इसलिए भी इन्हें भारी नुक़सान की आशंका है और ये चट्टानें इस नुक़सान से उबर पाएंगी या नहीं, यह तो तभी पता चलेगा जब उन्हें नुक़सान का आकलन कर लिया जाए. अंडमान निकोबार में पिछले क़रीब बीस साल में पर्यटन बहुत बढ़ा है. 1980 में हर साल सिर्फ़ दस हज़ार पर्यटक यहाँ आते थे लेकिन पिछले साल क़रीब एक लाख सैलानियों ने यहाँ की सैर की. उनमें से दसवाँ हिस्सा विदेशी पर्यटक थे. शास्त्री यह भी कहते हैं कि पर्यटकों की संख्या में बढ़ोत्तरी से मूँगा चट्टानों की विविधता और नाज़ुकपन पर असर पड़ सकता है. अंडमान निकोबार द्वीप समूह के बन्य जीवन बोर्ड और पर्यावरण संरक्षण परिषद ने मूँगा चट्टानों के संरक्षण के लिए भारतीय प्राणि विज्ञान सर्वेक्षण से सलाह माँगी है. |
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