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बुधवार, 05 जनवरी, 2005 को 09:15 GMT तक के समाचार
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अंडमान में अभी भी हज़ारों लोग लापता

अंडमान
लापता लोगों की तलाश हो रही है, लेकिन सफलता नहीं मिल रही
भारतीय तटरक्षक, नौसैनिक और पुलिस अंडमान-निकोबार द्वीपसूमह के कत्चल द्वीप की लापता आधी से ज़्यादा आबादी का पता लगाने में जुटे हैं.

26 दिसंबर को हिंद महासागर में आए भूकंप के कारण भारत में सबसे ज़्यादा प्रभावित अंडमान निकोबार ही हुआ है.

कत्चल द्वीप की आबादी सिर्फ़ 9000 है. लेकिन यह पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र रहा है. 26 दिसंबर को आए भूकंप के बाद सूनामी लहरों ने यहाँ जम कर तांडव मचाई.

इस द्वीप का आधा हिस्सा अभी भी पानी में डूबा हुआ है. भूगर्भशास्त्रियों का कहना है कि द्वीप का आधा हिस्सा समुद्र में विलीन हो गया है.

तलाश

दूसरी ओर अंडमान के मुख्य प्रशासक राम कापसे का कहना है कि कत्चली से सिर्फ़ 3912 लोगों को ही बचाया जा सका.

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कई द्वीप का बड़ा हिस्सा समुद्र में डूब गया है

58 लोगों को हेलिकॉप्टर की मदद से बचाया गया और फिर अस्पताल में इलाज के लिए भर्ती कराया गया.

लेकिन अभी भी इस द्वीप के 4500 लोग लापता बताए जा रहे हैं. इस बारे में अंडमान के सैनिक कमांडर लेफ़्टिनेंट जनरल भूपिंदर सिंह ठाकुर कहते हैं, "बाक़ी के लोग लापता हैं. हम उन्हें तलाश करने की जी-जान से कोशिश कर रहे हैं."

लेकिन हादसे के क़रीब एक सप्ताह बाद किसी के बच पाने की कम ही उम्मीद है. कोलकाता से आए सैकड़ों तटरक्षक सैनिक कत्चल में लापता लोगों की तलाश में जुटे हैं. लेकिन अभी तक सिर्फ़ छह लोगों के शव ही बरामद हो पाए हैं.

नौसैनिक और स्थानीय पुलिस भी तटरक्षकों के अभियान में सहायता कर रही है. लेकिन कत्चल के निवासियों को लापता लोगों के बच पाने की उम्मीद नहीं. कत्चल के निवासी पुतुकुमार का मानना है कि बाक़ी के लोग समुद्र में डूब गए.

समस्या

लेकिन सरकार कब तक इन्हें लापता लोगों की सूची में रखेगी. केंद्रीय गृह राज्य मंत्री श्रीप्रकाश जयसवाल कहते हैं, "आधिकारिक रिकॉर्ड आधिकारिक होते हैं और जब तक लापता लोगों के शव नहीं मिलते उन्हें लापता लोगों की सूची में ही रखा जाता है."

 आधिकारिक रिकॉर्ड आधिकारिक होते हैं और जब तक लापता लोगों के शव नहीं मिलते उन्हें लापता लोगों की सूची में ही रखा जाता है
श्रीप्रकाश जयसवाल, केंद्रीय गृह राज्य मंत्री

पत्रकार और सामाजिक कार्यकर्ता बसुदेव दास इसे एक बड़ी समस्या मानते हैं. उन्होंने बताया, "दरअसल आपके परिवार के सदस्य मर चुके हैं लेकिन आपको सरकारी मुआवज़ा नहीं मिल सकता. क्योंकि सरकारी रिकॉर्ड में उनके नाम लापता लोगों की सूची में दर्ज हैं."

कई सामाजिक संगठनों की मांग है कि अगर 15 दिनों तक लापता लोगों के शव नहीं मिलते तो उन्हें मृत घोषित कर देना चाहिए और उनके परिवारवालों को मुआवज़े का भुगतान होना चाहिए.

लेकिन अंडमान के मुख्य सचिव वीवी भट्ट का कहना है कि आधिकारिक प्रक्रिया इतनी जल्दी नहीं बदलती.

सरकार ने इस द्वीप में अभी आधिकारिक तौर पर सिर्फ़ 800 लोगों के मारे जाने की बात कही है जबकि तीन हज़ार लापता हैं.

लेकिन अंडमान के सैनिक कमांडर ने जो आँकड़े दिए हैं उससे यही पता चलता है कि अकेले कत्चल द्वीप में 4500 से ज़्यादा लोग लापता हैं.

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