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सोमवार, 03 जनवरी, 2005 को 13:01 GMT तक के समाचार
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विदेशी एजेंसियों ने इजाज़त माँगी
सूनामी से भीषण तबाही
सहायता पहुँचाने की कोशिशें तेज़ हुई हैं
विदेशी सहायता एजेंसियों ने सूनामी लहरों से प्रभावित अंडमान निकोबार द्वीप समूह में राहत और सहायता के कामों में शामिल होने के लिए भारत सरकार से इजाज़त माँगी है.

अंडमान निकोबार सूनामी लहरों से बड़े पैमाने पर प्रभावित हुआ है और यह इलाक़ा सुरक्षा चिंताओं और वहाँ की संस्कृति पर प्रभाव की आशंका के मद्देनज़र विदेशियों के लिए बंद है.

अंतरराष्ट्रीय सहायता संगठन ऑक्सफ़ैम के एक वरिष्ठ अधिकारी ने सोमवार को कहा कि विदेशी एजेंसियों को वहाँ जाने की इजाज़त नहीं दिए जाने से सहायता प्रयासों में बहुत देरी हो रही है और मूल्यवान समय व्यर्थ हो रहा है.

अंडमान निकोबार द्वीप समूह में छह हज़ार से ज़्यादा लोगों की मौत की पुष्टि की गई है.

अन्य दस हज़ार के बारे में भी कोई पता नहीं चला है और उनके बारे में आधिकारिक तौर पर भी कोई पुष्टि नहीं की गई है.

समाचार एजेंसी एपी ने पूर्वी भारत में ऑक्सफ़ैम की कर्ताधर्ता शाहीन नीलोफ़र के हवाले से कहा है, "विदेशी एजेंसियों को राहत और सहायता कार्यों में भागीदारी की इजाज़त नहीं देने से सिर्फ़ देर ही हो रही है और इस देरी से मूल्यवान समय व्यर्थ जा रहा है."

"ग़रीब लोगों की मुश्किलें बढ़ाने के लिए कहीं ना कहीं, किसी ना किसी पर तो ज़िम्मेदारी ठहरेगी."

मेडिसिन्स सैन्स फ्रंटियर्स ऐसी पहली अंतरराष्ट्रीय सहायता एजेंसी रही है जिसे अंडमान में सहायता सामग्री ले जाने की इजाज़त दी गई है.

राहत सामग्री की आस में प्रभावित
कुछ स्थानों पर खाद्य सामग्री गिराई गई है

पोर्ट ब्लेयर में मौजूद बीबीसी संवाददाता सुबीर भौमिक का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों की राहत सामग्री अब भी हवाई अड्डे पर पड़ी है.

मेडिसिन्स सैन्स फ्रंटियर्स के भारत प्रभारी स्टुअर्ट ज़िम्बल ने बीबीसी से कहा, "हमें आशा है कि भारत सरकार डॉक्टरों की हमारी टीम को भी द्वीप समूह में जाने की इजाज़त देगी ताकि दवाइयाँ पहुँचाई जा सकें."

अंडमान निकोबार द्वीप समूह की आबादी क़रीब चार लाख है. इस इलाक़े में क़रीब 300 द्वीप हैं जिनमें से कुछ चट्टानों के ऊपर बसे हैं.

भारत सरकार ने इस द्वीप समूह में विदेशियों के जाने की इजाज़त इसलिए नहीं दी है क्योंकि कार निकोबार में भारत का एक महत्वपूर्ण सैनिक अड्डा है जो सुनामी लहरों में तबाह हो गया. वहाँ काफ़ी संख्या में लोग भी मारे गए हैं.

अंडमान निकोबार द्वीप समूह में रहने वाले लोग जातीय तौर पर बाक़ी दुनिया से भिन्न हैं इसलिए वहाँ विदेशियों को जाने की इजाज़त नहीं है.

स्टुअर्ट ज़िम्बल कहते हैं, "हम इस मामले में भारत सरकार की संवेदनशीलता को समझ सकते हैं लेकिन हम प्रशासन के साथ मिलजुलकर काम करने के लिए तैयार हैं."

"हम चाहते हैं कि हमारे डॉक्टर स्थानी डॉक्टरों के साथ मिलकर काम करें और द्वीप समूह में निकलकर जितने लोगों को संभव हो सके, बचा सकें."

महामारी का ख़तरा

अमरीकी अधिकारियों ने कहा है जैसे ही उन्हें इजाज़त मिल जाएगी, वे बड़े पैमाने पर राहत और सहायता कार्य शुरू करेंगे.

कोलकाता में अमरीकी वाणिज्य दूतावास के एक अधिकारी सौरभ सेन ने कहा, "हमें आशा है कि राहत कार्यों में शामिल होने की हमें भी इजाज़त दी जाएगी."

संयुक्त राष्ट्र बाल आपदा कोष (यूनीसेफ़) का भी एक दल पोर्ट ब्लेयर में मौजूद है. उस दल का कहना है कि अधिकारियों ने उनसे कुछ दवाइयाँ लाने के लिए कहा है क्योंकि हैजा फैलने का ख़तरा मंडरा रहा है.

भारतीय सेना ने रविवार को कहा था कि अंडमान निकोबार द्वीप समूह में बसावत वाले इलाक़ों में विमानों के ज़रिए खाद्य सामग्री गिराई गई थी.

इस द्वीप समूह के कुछ दक्षिणी इलाक़ों में बीमारी फैलने की ख़बरें मिल रही हैं.

बीबीसी संवाददाता का कहना है कि राहतकर्मी ख़ासतौर से पानी की गंदगी से पैदा होने वाली बीमारियाँ फैलने से डरे हुए हैं क्योंकि सुनामी की वजह से कुँए और पानी के अन्य स्रोत प्रदूषित हो गए हैं.

तमिलनाडु

तमिलनाडु में ज़्यादातर मृतकों का अंतिम संस्कार कर दिया गया है और प्रभावित इलाक़ों में चिकित्सालय और दवाई केंद्र खोले जा रहे हैं.

राज्य में ज़्यादातर राहत और सहायता अनौपचारिक दानदाताओं से पहुँच रही है जैसेकि-व्यवसायी, सामुदायिक संगठन और निजी तौर पर दान देने वाले लोग.

भारत सरकार कह चुकी है कि उसे विदेशी सहायता की ज़रूरत नहीं है लेकिन राहतकर्मियों का कहना है कि सरकारी प्रतिनिधियों की प्रभावित क्षेत्रों की यात्राओं से राहत कार्यों में अक्सर बाधा पहुँच रही है.

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