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तमिलनाडु में अब पुनर्निर्माण पर ध्यान | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत में सूनामी से प्रभावित दक्षिणी राज्य तमिलनाडु में अधिकारियों का कहना है कि बचाव कार्य के बाद अब ध्यान पुनर्निर्माण के कार्यों पर लगाया जा रहा है. तमिलनाडु सरकार ने केंद्र सरकार से आपात कोष से एक अरब डॉलर की मांग की है. राज्य में क़रीब 20 हज़ार परिवारों को मुआवज़े की पहली किस्त दी जा चुकी है. साथ में राज्य के मछुआरों की सहायता के लिए भी क़दम उठाए जा रहे हैं ताकि वे अपनी जीविका के लिए ज़रूरी सामान ख़रीद सकें. तमिलनाडु में सूनामी लहरों से सबसे ज़्यादा मछुआरे ही प्रभावित हुए हैं. सिर्फ़ नागापट्टन ज़िले में नाव, जाल और अन्य उपकरणों को हुए नुक़सान की क़ीमत 12 करोड़ 50 लाख डॉलर आंकी गई है. नुक़सान नागापट्टनम के अलावा राज्य के छह और तटवर्ती ज़िले सूनामी लहरों के कारण प्रभावित हुए हैं. यहाँ भी सबसे ज़्यादा नुक़सान पहुँचा है मछुआरों को ही.
राहत अधिकारियों का कहना है कि छह महीने के अंदर अगर मछुआरों को इस लायक़ बना दिया जाए कि वे काम पर लौट सकें, तो उनके मानसिक रूप से बहुत राहत मिलेगी. कई मछुआरों का तो कहना है कि वे समुद्र में जाने से भी अब डरने लगे हैं. इसलिए उनके लिए मनोचिकित्सकों की सहायता उपलब्ध कराए जाने की बात कही जा रही है. नागापट्टनम में स्कूल खुलना भी महत्वपूर्ण है. इस सप्ताह स्कूल खोलने की बात कही जा रही थी. लेकिन अब अधिकारियों का कहना है कि बड़ी संख्या में बच्चों के मारे जाने के कारण अब अगले सप्ताह से ही स्कूल खुल पाएँगे. हज़ारों मकान भी सूनामी लहरों की भेंट चढ़ गए हैं और राज्य सरकार का कहना है कि केंद्र से सहायता राशि इसलिए मांगी जा रही है ताकि इलाक़ों में पुनर्निर्माण कार्य चलाया जा सके. |
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