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पूरी कोशिश हो रही है:अय्यर | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत के तेल और प्राकृतिक गैस मंत्री मणिशंकर अय्यर ने कहा है कि समुद्री उफान से देश के दक्षिणी हिस्सों में हुई तबाही में राहत और बचाव के लिए सरकार पूरी कोशिश कर रही है. मणिशंकर अय्यर और एक अन्य मंत्री दयानिधि मारन को प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने अपना विशेष दूत बनाकर तमिलनाडु भेजा है ताकि राहत और बचाव कार्यों में ज़्यादा समन्वय बनाया जा सके. अय्यर ने सोमवार सुबह चेन्नई हवाई अड्डे पर रवाना होते समय मोबाइल फ़ोन पर बीबीसी हिंदी से बातचीत में बताया कि हिंद महासागर में भूकंप के बाद उठे तूफ़ान से अब तक क़रीब दो हज़ार लोग मारे जा चुके हैं. अय्यर ने कहा कि यह संख्या बढ़ भी सकती है क्योंकि अभी सिर्फ़ शवों की गिनती करके यह संख्या बताई जा रही है, किसी को नहीं पता कि आगे चलकर यह संख्या कितनी होगी. जब उनसे यह पूछा गया कि क्या आपदा प्रबंधन प्रभावित लोगों तक सहायता सही तरीक़े से पहुँचा पा रहा है तो उन्होंने कहा कि इसमें कमियाँ तो होंगी ही क्योंकि बहुत बड़े पैमाने पर त्रासदी हुई है. हालाँकि उन्होंने कहा, "ख़ुशी की बात है कि रविवार को दो लाख 41 हज़ार भोजन के पैकेट प्रभावितों में बाँटे गए लेकिन जब तक मैं अपनी आँखों से राहत और बचाव कार्यों का जायज़ा नहीं ले लेता, तब तक कुछ और कहना मुश्किल है." आपदा प्रबंधन की कार्यकुशलता के बारे में अय्यर ने कहा कि इस तरह का तूफ़ान भारत में बहुत कम देखा जाता है और शायद साठ साल के बाद यह आया है. उन्होंने कहा कि और तरह का भूकंप या प्राकृतिक आपदा होती तो शायद पूर्व चेतावनी दी जा सकती थी लेकिन बात यह नहीं, बात ये है कि सरकार का इरादा पक्का है और राज्य और केंद्र दोनों ही सरकारें प्रभावितों को राहत पहुँचाने की पूरी कोशिश हो रही हैं. अय्यर सोमवार को दयानिधि मारन के साथ तमिलनाडु के प्रभावित क्षेत्रों का दौरे पर निकले. |
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