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सोमवार, 28 नवंबर, 2005 को 14:10 GMT तक के समाचार
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'चापलूसी, जोड़तोड़ पार्टी का हिस्सा'
गोविंदाचार्य
गोविंदाचार्य ने इससे पहले भी पार्टी में सामूहिक नेतृत्व के सवाल उठाए हैं
भारतीय जनता पार्टी और राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के वरिष्ठ नेता रहे गोविंदाचार्य ने कहा है कि चापलूसी, चालाकी, जोड़तोड़, तिकड़म, परिक्रमा और पैसा दुर्भाग्य से भाजपा का हिस्सा हो गया है.

उन्होंने कहा कि यदि इसका सफ़ाया ऊपर से ही न हो तो भगवान ही मालिक है.

उमा भारती की आत्महत्या की कथित धमकी के विषय में प्रकाशित ख़बर के बारे में प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने कहा कि यह जो कुछ अरुण जेटली ने किया है वह आपत्तिजनक है और उन्हें उमा भारती के कथित सुसाइड नोट को सार्वजनिक करना चाहिए.

उल्लेखनीय है कि उमा भारती ने सोमवार की सुबह भोपाल के दैनिक भास्कर में प्रकाशित ख़बर का खंडन किया है कि उन्होंने अरूण जेटली से बात करते हुए कभी आत्महत्या करने की धमकी दी थी.

तीखी टिप्पणियाँ

संघ और पार्टी दोनों से अलग होकर काम कर रहे गोविंदाचार्य ने मध्यप्रदेश का मुख्यमंत्री चुने जाने के फ़ैसले के बाद भाजपा नेतृत्व और कार्यप्रणाली पर तीखी टिप्पणियाँ की हैं.

सामूहिक नेतृत्व यानी 'कलेक्टिव लीडरशिप' के हिमायती गोविंदाचार्य ने फिर से कहा कि इस मामले में जो कुछ किया गया है वह 'कलेक्टिव लीडरशिप' नहीं 'सलेक्टिव लीडरशिप' है.

उनका कहना था कि संसदीय बोर्ड और तमाम समितियों का गठन अध्यक्ष करता है इसलिए उनका निर्णय अध्यक्ष पर बाध्यकारी नहीं होता लेकिन शेष लोगों पर होता है.

उन्होंने कहा कि पार्टी को चलाने के लिए एक स्थाई वैज्ञानिक तरीक़ा अपनाना चाहिए कोई कामचलाऊ तरीक़ा नहीं. और इस पर भाजपा सहित सभी दलों को विचार करना चाहिए.

नेता चुनने का तरीक़ा

उन्होंने उमा भारती का नाम लिए बिना कहा कि यदि यही कार्यप्रणाली रही और 'ऑफ़ द रिकॉर्ड' बातचीत बंद नहीं होती तब तक आम आदमी तो यही सोचेगा कि कुछ लोगों को हाशिए पर लाने के लिए कुछ गुट के लोग लगे हुए हैं.

 बीजेपी भी अन्य दलों की तरह ही मूल्यों और मुद्दों से भटक गई है और सत्ताभिमुख हो गई है
गोविंदाचार्य

गोविंदाचार्य ने कहा कि पैसे को प्रतिष्ठा मिल रही है पसीने को नहीं और इसे लेकर एहतियात बरतना चाहिए.

उनका कहना था, "सत्य प्रताड़ित हो सकता है पराजित नहीं हो सकता."

उन्होंने कहा कि जो कुछ मध्यप्रदेश में हुआ है वह प्रताड़ना है. उन्होंने कहा कि राजनीति में ऐसे उतार चढ़ाव आते रहते हैं.

गोविंदाचार्य ने कहा, "बीजेपी भी अन्य दलों की तरह ही मूल्यों और मुद्दों से भटक गई है और सत्ताभिमुख हो गई है."

उनका कहना था कि किसी पार्टी, ख़ासकर भाजपा जैसी पार्टी के लिए सत्ता ही साध्य बने यह देश के हित में नहीं दिखाई देता.

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