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मध्य प्रदेश भाजपा में विवाद गहराया | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारतीय जनता पार्टी की चर्चित नेता और मध्य प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती को लेकर राजनीतिक एक बार फिर तेज़ हो गई है. उनको दोबारा मुख्यमंत्री बनाने की मांग हो रही है. उमा भारती समर्थक विधायकों ने रविवार को भोपाल में एक शक्ति प्रदर्शन कर पार्टी नेताओं पर दबाव बनाने की कोशिश की है. इसके बाद प्रदेश भाजपा अध्यक्ष शिवराज सिंह चौहान ने एक बैठक बुलाकर इस विषय पर चर्चा की है. उमा भारती ने बिहार का अपना चुनावी दौरा रद्द कर दिया है और भोपाल से उज्जैन के लिए रवाना हो गई हैं. वैसे ताज़ा विवाद की शुरुआत उमा भारती के उस पत्र से हुई है जो उन्होंने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ यानी आरएसएस नेतृत्व को लिखा था और यह पत्र मीडिया तक पहुँच गया था. राज्य की राजनीति रविवार को उमा भारती के भोपाल स्थित निवास पर 40 से अधिक विधायक दशहरा मिलन के लिए एकत्रित हो गए थे. इन विधायकों ने एक हस्ताक्षर अभियान चलाकर एक पत्र पार्टी नेता लालकृष्ण आडवाणी को भेजा है जिसमें कहा गया है कि विधायक दल की बैठक बुलाकर नए नेता का चुनाव किया जाए और उमा भारती को फिर मुख्यमंत्री बनाया जाए. हालांकि उमा भारती ने कहा है कि यह कोई शक्ति प्रदर्शन नहीं था. इस समय राज्य की भाजपा सरकार के मुख्यमंत्री बाबूलाल गौर हैं जो पिछले साल उमा भारती के मुख्यमंत्री पद छोड़ने के बाद इस पद पर आए थे. रविवार को उमा भारती के समर्थन में कों में कम से कम तीन मंत्री और कई पूर्व मंत्री थे. इन विधायकों का दावा है कि उन्होंने 80 से अधिक विधायकों के हस्ताक्षर एकत्रित किए हैं. एक पूर्व मंत्री हिम्मतसिंह राठौर के हवाले से समाचार एजेंसियों ने कहा है, "बाबूलाल गौर के मुख्यमंत्रित्व काल में राज्य सौ वर्ष पीछे चला गया है और मुझे यह कहने में कोई हिचक नहीं है कि विधायक दल की बैठक बुलाकर उमा भारती को फिर मुख्यमंत्री बनाया जाना चाहिए." बैठक रविवार को विधायकों की बैठक और लालकृष्ण आडवाणी को कथित रुप से पत्र लिखे जाने के बाद सोमवार को प्रदेश भाजपा अध्यक्ष शिवराज सिंह चौहान ने एक बैठक बुलाई थी. इस बैठक में उमा भारती के अलावा कप्तान सिंह भी मौजूद थे. पार्टी के कुछ वरिष्ठ नेता रविवार की बैठक के ख़िलाफ़ सामने आए हैं. उदाहरण के तौर पर जयंत मलैया ने कहा है कि जो लोग पार्टी के फ़ैसले के ख़िलाफ़ जाना चाहते हैं उन्हें पहले सरकार छोड़ना चाहिए फिर मुख्यमंत्री बदलने की बात कहनी चाहिए. पार्टी नेताओं का कहना है कि कई विधायकों ने कहा है कि वे रविवार की बैठक में सिर्फ़ इसलिए चले गए थे क्योंकि पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती ने यह बैठक बुलाई थी, वरना वे पार्टी के निर्णय के आधार पर ही चलेंगे. मंगलवार को उमा भारती एक धार्मिक सभा करने वाली हैं और माना जा रहा है यह एक दूसरा शक्ति प्रदर्शन होगा. भाजपा-आरएसएस वैसे उमा भारती को लेकर राजनीतिक दूसरे कारणों से गर्माई है.
इसके पीछे उमा भारती का वो पत्र है जो उन्होंने आरएसएस प्रमुख केएस सुदर्शन को लिखा है. मीडिया में ज़ाहिर हो चुके इस पत्र में आरएसएस के एक नेता सुरेश सोनी की शिकायत की गई है. पत्र में उमा भारती ने कथित रुप से लिखा है कि सुरेश सोनी उनके ख़िलाफ़ कार्य कर रहे हैं. इस पत्र पर उमा भारती ने सफ़ाई देने की कोशिश की है लेकिन संघ ने इसे अस्वीकार कर दिया है और कहा है कि ऐसा एक पत्र लिखा गया है और मीडिया में छपी ख़बरें सही हैं. ज़ाहिर रुप से संघ इस पत्र के मीडिया में जाने से बेहद नाराज़ है. इस पत्र ने भाजपा और संघ के तनावपूर्ण हो गए रिश्ते में थोड़ी कडुवाहट और घोली है. |
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