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तीन सप्ताह में 100 चरमपंथियों की मौत | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
अफ़ग़ानिस्तान में अमरीकी सेना का कहना है कि देश के दक्षिणी और पूर्वी हिस्सों में विभिन्न अभियानों में पिछले क़रीब तीन सप्ताह के दौरान '100 से ज़्यादा संदिग्ध चरमपंथी मारे गए हैं'. अमरीकी सेना के अनुसार पूर्वी कुनार प्रांत में जून में उस अभियान में 40 से ज़्यादा संदिग्ध चरमपंथी मारे गए थे जिसमें 19 अमरीकी सैनिकों की भी जान गई थी. सेना का कहना है कि दक्षिणी ज़ाबुल प्रांत में हुई लड़ाई में 65 चरमपंथी मारे गए थे. सितंबर में होने वाले संसदीय चुनावों को देखते हुए तालेबान ने हिंसा में तेज़ी कर दी है. पिछले क़रीब छह महीनों के दौरान 50 अमरीकी सैनिक भी मारे गए हैं. रविवार को संदिग्ध विद्रोहियों ने ज़ाबुल प्रांत में डाइचोपन में एक सड़क के किनारे किए बम विस्फोट किया था जिसमें चार अमरीकी सैनिकों की मौत हो गई थी. तालेबान की तरफ़ से अभी अमरीकी सेना के इन आँकड़ों पर कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है. अमरीकी सेना के लैफ़्टिनेंट कर्नल जैरी ओ हारा ने कहा, "दुश्मन लड़ाकों के साथ हमारी 29 मुठभेड़ें हुई हैं जिनमें 40 से ज़्यादा की मौत हुई और अनेक घायल हुए." विशेष अभियान अमरीकी सेना का कहना है कि गठबंधन सेनाओं ने संसदीय चुनाव में बाधा रहित मतदान कराने की कोशिशों के तहत कुनार प्रांत में एक विशेष अभियान चलाया है. मेजर जनरल जैसन कामिया का कहना था, "कुछ सप्ताहों के बाद अफ़ग़ानिस्तान के लोग एक नई संसद का चुनाव करेंगे जो एक तरह से हिंसा और तकलीफ़ों के ख़िलाफ़ मतदान होगा और लोग समृद्ध भविष्य के लिए अपनी राय ज़ाहिर करेंगे." उन्होंने कहा कि विद्रोहियों के पास भी लोकतांत्रिक प्रक्रिया में शामिल होने का विकल्प है या फिर वे "लड़ाई, हिंसा, मौत और हार के साए में ज़िंदगी जीना जारी रख सकते हैं." |
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