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अफ़ग़ानिस्तान के संसदीय चुनाव टले | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
संयुक्त राष्ट्र ने कहा है कि तालेबान शासन ख़त्म होने के बाद अफ़ग़ानिस्तान में पहली बार होने जा रहे संसदीय चुनाव पूर्व निर्धारित समय पर नहीं हो पाएँगे. पहले जो कार्यक्रम तय था उसके अनुसार चुनाव 21 मई को होने थे लेकिन व्यावहारिक कठिनाइयों और सुरक्षा कारणों से राष्ट्रपति हामिद करज़ई चुनावों की घोषणा नहीं कर सके हैं. अफ़ग़ानिस्तान के नए संविधान के मुताबिक़ किसी भी चुनाव की घोषणा कम से कम 90 दिन पहले करनी होगी. संवाददाताओं का कहना है कि चुनाव छह महीनों के लिए टाले जा सकते हैं. संयुक्त राष्ट्र के अधिकारियों ने इस बात की पुष्टि की है कि 21 मई को होने वाले चुनाव फ़िलहाल टाल दिए गए हैं. इसके पीछे एक महत्वपूर्ण कारण यह भी है कि चुनाव की पद्धति, मतदाता सूची और चुनाव क्षेत्रों का सीमांकन जैसे महत्वपूर्ण मसलों पर अभी तक कोई ठोस निर्णय नहीं लिया जा सका है. संवाददाताओं का कहना है कि इस समय जो प्रावधान हैं उसके चलते, आशंका है कि संसद में निर्दलीय उम्मीदवार ज़्यादा चुनकर आ जाएँगे जिनमें क़बिलियाई नेता भी हो सकते हैं. अधिकारी चाहते हैं कि व्यवस्था ऐसी होनी चाहिए जिससे राजनीतिक पार्टियों को उभरने का मौक़ा मिले. उल्लेखनीय है कि पिछले अक्तूबर में ही अफ़ग़ानिस्तान में राष्ट्रपति पद के लिए चुनाव हुए थे जिसमें हामिद करज़ई को भारी बहुमत से जीत मिली थी. |
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