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'अफ़ग़ानिस्तान मानवीय संकट की ओर' | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
अफ़ग़ानिस्तान में सरकारी अधिकारियों और राहतकर्मियों को आशंका है कि कड़ाके की ठंड की वजह से देश के कई हिस्से ज़बर्दस्त मानवीय संकट की ओर बढ़ रहे हैं. एक अंतरराष्ट्रीय राहत एजेंसी के अनुमान के अनुसार सिर्फ़ एक ही प्रांत में कई गाँव ज़बरदस्त बर्फ़बारी की वजह से देश के बाक़ी हिस्सों से कट गए है. वहाँ इस संकट में मारे गए बच्चों की संख्या एक हज़ार तक हो सकती है. वहाँ के डिप्टी गवर्नर ने मानवीय त्रासदी से बचने के लिए तुरंत मदद की अपील की है. अफ़ग़ानिस्तान में पिछले एक दशक की ये सबसे कड़ाके की ठंड बताई जा रही है और पिछले हफ़्ते से हर दिन लोगों के मारे जाने की ख़बरें लगातार आ रही हैं. युद्ध से तबाह हुए बुनियादी ढाँचे वाले इस देश के लिए इस ठंड ने और भी मुश्किलें खड़ी कर दी हैं. संपर्क टूटा भूस्खलन और सड़क दुर्घटनाओं की वजह से कुछ जानें गई हैं मगर अधिकतर मौतें अलग थलग पड़े ग्रामीण इलाक़ों में हुई हैं जिनसे संपर्क ज़बर्दस्त बर्फ़बारी की वजह से बाक़ी देश से कई हफ़्तों से कटा हुआ है. ये ताज़ा आँकड़े पश्चिमी ग़ोर प्रांत के एक ऐसे ही ग़रीब इलाक़े से आए हैं. राहत कार्यों में लगे लोग अभी बहुत कम ही गाँवों में पहुँच पाए हैं मगर वे जहाँ भी पहुँचे हैं वहाँ के अनुभवों के आधार पर उनका कहना है कि कुछ सौ से लेकर हज़ारों तक की संख्या में बच्चों की जान गई हो सकती है. वहाँ अधिकतर बच्चे खाना नहीं मिलने और ठंड की वजह से मारे गए हैं मगर बाक़ी जगहों पर भी हालात कुछ ऐसे ही होने की आशंका है. संयुक्त राष्ट्र के और अन्य राहत संगठनों के अधिकारी ये स्वीकार करते हैं कि उनके पास परिस्थिति की सही तस्वीर नहीं है क्योंकि कई इलाक़ों तक पहुँचना संभव ही नहीं हो पा रहा है. देश के दक्षिणी हिस्सों में तो अमरीकी सेना राहत सामग्री हवाई रास्तों के ज़रिए पहुँचा रही है मगर कुछ राहत अधिकारी मानते हैं कि ये कड़ाके की ठंड अभी उनके सामने और चौंकाने वाली चीज़ें भी सामने ला सकती है. |
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