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गुरुवार, 17 फ़रवरी, 2005 को 10:02 GMT तक के समाचार
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'अफ़ग़ान पुनर्निर्माण सहायता तेज़ हो'
अफ़ग़ान शरणार्थी
बहुत से शरणार्थी कड़ाके की ठंड में रह रहे हैं
संयुक्त राष्ट्र के शरणार्थी उच्चायुक्त रुऊद लुब्बर्स ने दानकर्ता देशों से अनुरोध किया है कि वे अफ़ग़ानिस्तान में पुनर्निर्माण के लिए दी जाने वाली अपनी सहायता को तेज़ करें.

अफ़ग़ानिस्तान से जाने वाले और वहाँ पहुँचने वाले शरणार्थियों की समस्या पर विचार करने के लिए ब्रसेल्स में तीन देशों के अधिकारियों की एक बैठक के बाद उन्होंने यह अनुरोध किया है.

इस बैठक का आयोजन संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी उच्चायुक्त ने किया है और इसमें अफ़ग़ानिस्तान, पाकिस्तान और ईरान के अधिकारियों ने हिस्सा लिया.

इस समय अफ़ग़ानिस्तान के सामने एक बड़ा काम पाकिस्तान और ईरान से अपने शरणार्थियों की वापसी का इंतज़ाम करना है.

दो दिन की इस बैठक की समाप्ति पर रुऊद लुब्बर्स ने कहा कि क़रीब दस लाख अफ़ग़ान शरणार्थियों को साल 2006 के अंत तक वापस लाया जा सकेगा. उन्होंने साथ ही पाकिस्तान और ईरान से अनुरोध किया कि वे अफ़ग़ान शरणार्थियों के प्रति नरम रवैया अपनाएँ.

उन्होंने कहा कि इन देशों को ऐसे शरणार्थियों को स्थाई निवासी का दर्जा देने पर भी विचार कर सकते हैं जो वहाँ स्थाई रूप से ठहरना चाहते हैं.

अफ़ग़ानिस्तान में दशकों के हिंसक संघर्ष की वजह से कम से कम पचास लाख लोग अपने घर छोड़कर पाकिस्तान और ईरान पहुँच गए हैं.

ख़ासतौर से ईरान अफ़ग़ान शरणार्थियों की वापसी के बारे में जब-तब आवाज़ उठाता रहा है.

रुऊद लुब्बर्स

2001 में तालेबान शासन की समाप्ति के बाद से पाकिस्तान और ईरान से क़रीब पाँच लाख शरणार्थी स्वदेश वापस लौट चुके हैं.

समायोजन

बीबीसी के साथ एक इंटरव्यू में रुऊद लुब्बर्स से जब यह पूछा गया कि क्या सभी अफ़ग़ान शरणार्थियों को वापस बुलाना लक्ष्य है, तो उन्होंने कहा, "नहीं, बिल्कुल नहीं, लक्ष्य सभी की वापसी नहीं है."

"पाकिस्तान और ईरान में जितने अफ़ग़ान शरणार्थी रह रहे हैं उनमें से जितने भी हो सकें, वापस जाएँ और उन्हें वहाँ बसने के लिए आर्थिक पैकेज दिए जाएँ. महत्वपूर्ण ये है कि ऐसे लोगों को फिर से मुख्य धारा में समायोजित करने के लिए अंतरराष्ट्रीय सहायता बढ़ाई जाए."

संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी उच्चायुक्त इस बात से भली-भाँति अवगत हैं कि जो अफ़ग़ान शरणार्थी विदेशों में मुख्य धारा में घुलमिल गए हैं, हो सकता है कि वे अफ़ग़ानिस्तान लौटने के लिए इच्छुक ना हों.

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