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अफ़ग़ान शरणार्थियों पर महत्वपूर्ण बैठक | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
अफ़ग़ानिस्तान से जाने वाले और वहाँ पहुँचने वाले शरणार्थियों की समस्या पर विचार करने के लिए तीन देशों के अधिकारियों की एक बैठक ब्रसेल्स में बुधवार को हो रही है. इस बैठक का आयोजन संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी उच्चायुक्त ने किया है और इसमें अफ़ग़ानिस्तान, पाकिस्तान और ईरान के अधिकारी बातचीत कर रहे हैं. अफ़ग़ानिस्तान में दशकों के हिंसक संघर्ष की वजह से कम से कम पचास लाख लोग अपने घर छोड़कर पाकिस्तान और ईरान पहुँच गए हैं. संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी उच्चायुक्त ने पिछले तीन साल में क़रीब 35 लाख शरणार्थियों को वापस लाने में मदद की है. इसे एक बड़ी कामयाबी बताया जा रहा है लेकिन इससे भी अब नई समस्याएँ पैदा होने लगी हैं. संयुक्त राष्ट्र की शरणार्थी एजेंसी का कहना है कि बाक़ी शरणार्थियों की वापसी सुनिश्चित करने के लिए ज़रूरी है कि समुचित धन वक़्त पर मिलता रहे. लेकिन धन का मिलना बिल्कुल स्वैच्छिक है और संयुक्त राष्ट्र ख़ासतौर से उन अफ़ग़ानियों के बारे में चिंतित है जो पाकिस्तान और ईरान में ही रहना चाहते हैं. ख़ासतौर से ऐसे में जब ईरान अपने यहाँ रहने वाले अफ़ग़ान शरणार्थियों पर वापस जाने के लिए दबाव डाल रहा है. अफ़ग़ानिस्तान में इतने साले लोगों को वापस लेने पर समस्याएँ सामने आ रही हैं क्योंकि देश दशकों की लड़ाई के बाद ख़ुद को संकट से उबारने की कोशिश कर रहा है. वापस लौटने वाले हज़ारों लोग अपने घरों को नहीं गए हैं और वे काबुल या अन्य शहरों में रहकर काम की तलाश कर रहे हैं. इनमें से ज़्यादातर लोग ऐसे हैं जिनके घर लड़ाई में तबाह हो गए हैं. इससे देश के पहले से ही कमज़ोर आर्थिक ढाँचे पर काफ़ी दबाव पड़ रहा है और बहुत से लोग बहुत ही दयनीय स्थिति में रहने के लिए मजबूर हैं. |
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