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मिसाइलें वापस लेने का अभियान | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
अफ़ग़ानिस्तान में सरकार ने एक नया अभियान शुरू किया है जिसके तहत लोगों से अनुरोध किया गया है कि वे 1980 के दौर में सोवियत संघ की सेनाओं के ख़िलाफ़ हुई लड़ाई में इस्तेमाल की गई स्टिंगर मिसाइलें सरकार को वापस कर दें. इस अभियान के तहत देश की ख़ुफ़िया सेवा उन लोगों को कुछ धन देगी जो ऐसी मिसाइलें सरकार को सौंपेंगे. अमरीकी ख़ुफ़िया एजेंसी सीआईए ने सोवियत सेनाओं के ख़िलाफ़ लड़ाई करने के लिए अफ़ग़ान विद्रोहियों को स्टिंगर मिसाइलें दी थीं. अब डर ज़ाहिर किया किया गया है कि ये मिसाइलें नई सरकार के विरोधियों या चरमपंथियों के हाथ लग सकती हैं. समाचार एजेंसी एपी ने जनरल मोहम्मद ज़ाहिर अज़ीमी के हवाले से ख़बर दी है कि अभी तक निशस्त्रीकरण कार्यक्रम के तहत सिर्फ़ चार स्टिंगर मिसाइलें बरामद की गई हैं. जनरल अज़ीमी का कहना था, "स्टिंगर मिसाइलें मूल्यवान हैं और बहुत महत्वपूर्ण हथियार है. ऐसे हथियारों को कोई भी आसानी से छोड़ना नहीं चाहता." स्टिंगर मिसाइलें ढोने और इस्तेमाल करने में बहुत आसान हैं, इन्हें आठ किलोमीटर की दूरी से दागा जा सकता है और यह तीन हज़ार मीटर की ऊँचाई तक मार कर सकती हैं. अमरीकियों का मानना है कि 200 से 300 स्टिंगर मिसाइलें तालेबान या अल क़ायदा के सदस्यों के हाथ लग गई हैं, हालाँकि अफ़ग़ानिस्तान में अभी अमरीकी सेनाओं के ख़िलाफ़ स्टिंगर मिसाइलें इस्तेमाल नहीं हुई हैं. अफ़ग़ान ख़ुफ़िया एजेंसी इस अभियान के तहत बड़े पैमाने पर प्रचार करके लोगों को स्टिंगर मिसाइलें वापस करने के लिए तैयार करेगी और जो लोग ये मिसाइलें वापस कर देंगे उन्हें एक लाख़ अफ़ग़ानी मुद्रा यानी क़रीब 2300 अमरीकी डॉलर तक की राशि दी जाएगी. |
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