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रविवार, 01 मई, 2005 को 02:15 GMT तक के समाचार
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अफ़ग़ान उम्मीदवारों का रजिस्ट्रेशन
उम्मीदवार
उम्मीदवारों के रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया तीन सप्ताह तक चलेगी
अफ़ग़ानिस्तान में इस वर्ष सितंबर महीने में होने वाले संसदीय चुनाव के लिए उम्मीदवारों के रजिस्ट्रेशन का काम शुरू हो गया है.

संसदीय चुनाव के लिए रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया तीन सप्ताह तक चलेगी, चुनाव की निगरानी करने वाली संयुक्त प्रबंधन समिति (जेईएमबी) का कहना है कि लगभग दस हज़ार आवेदन मिलने की संभावना है.

नियम बहुत आसान है, आवेदक की उम्र 25 वर्ष से अधिक होनी चाहिए और उसे अपने कम से कम 300 समर्थकों के हस्ताक्षर पेश करने होंगे.

काबुल से बीबीसी संवाददाता का कहना है कि उम्मीदवारों की बड़ी संख्या और अलग-अलग गुटों की कड़ी प्रतिद्वंद्विता के कारण चुनाव कराना बहुत ही चुनौती भरा काम होगा.

चुनाव लड़ने वाले लोगों को सरकारी पदों से इस्तीफ़ा देना होगा और उन्हें हलफ़नामा दायर करके कहना होगा कि उनका किसी हथियारबंद गुट से कोई संबंध नहीं है.

आवेदन पत्रों की जाँच के बाद उम्मीदवारों की सूची जुलाई में जारी की जाएगी.

विश्लेषकों का कहना है कि ये चुनाव अफ़ग़ानिस्तान में लोकतंत्र की स्थापना की दिशा में मील का पत्थर साबित होंगे लेकिन हिंसा और गड़बड़ी की आशंका भी व्यक्त की जा रही है.

तालेबान की चुनाव में बाधा डालने की धमकी और मामूली हिंसा के बावजूद पिछले वर्ष हुए राष्ट्रपति चुनावों को काफ़ी सफल माना गया था.

चिंताएँ

अमरीकी सैनिक अधिकारियों ने तालेबान के किसी बड़े हमले की आशंका व्यक्त की है लेकिन उन्होंने इससे अधिक कोई जानकारी नहीं दी है.

अफ़ग़ान महिला
इस बार महिलाओं के सत्तर सीटें आरक्षित हैं

अफ़ग़ानिस्तान में 18 हज़ार से अधिक विदेशी सैनिक मौजूद हैं और तालेबान के साथ देश के दक्षिणी हिस्से में उनकी झड़पें जारी हैं.

देश में क़ानून व्यवस्था को लेकर स्थिति चिंताजनक बनी हुई है क्योंकि क़बायली सरदारों के हथियारबंद गुट अब भी अलग-अलग इलाक़ों में अपना क़ानून चला रहे हैं.

राष्ट्रपति हामिद करज़ई ने क़बायली सरदारों पर नियंत्रण हासिल करने और उनसे हथियार डलवाने की कोशिश की है लेकिन उन्हें ख़ास सफलता नहीं मिली है.

बहुत बड़ी संख्या में उम्मीदवार ऐसे हैं जो पहले मुजाहिदीन गुटों के कमांडर रहे हैं और रूसी सेना के ख़िलाफ़ संघर्ष में शामिल रहे हैं, उनकी आपसी रंजिश और प्रतिद्वंद्विता के कारण भी हिंसा की आशंका बनी हुई है.

इस बार के चुनाव में 249 सीटों वाले संसद के निचले सदन में महिलाओं के लिए 70 सीटें आरक्षित हैं.

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