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अफगान चुनाव की निष्पक्षता पर विवाद | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
अफगानिस्तान में पहली बार लोकतांत्रिक तरीके से हो रहे राष्ट्रपति चुनावों में अधिकतर उम्मीदवारों ने मतदान का बहिष्कार किया और चुनाव स्थगित करने की मांग की है. बहुत से उम्मीदवारों ने आरोप लगाया कि मतदान में बड़े पैमाने पर धाँधली हुई है. इसी के बाद ऐसी ख़बरें मिलीं कि राष्ट्रपति पद के 18 उम्मीदवारों में से अधिकतर का कहना है कि वो अब चुनावों को वैध नहीं मानते. लेकिन संयुक्त राष्ट्र और अफ़ग़ानिस्तान के संयुक्त चुनाव आयोग ने कहा कि मतदान बिना किसी बाधा के जारी रहा और यह 'सुरक्षित और व्यवस्थापूर्ण' रहा. काबुल में बीबीसी संवाददाता संजय मजूमदार का कहना है कि अगर चुनावों की निष्पक्षता पर सवाल उठाए गए तो आयोजकों के लिए यह एक बड़ा झटका होगा. इस मतदान को अंतरिम राष्ट्रपति हामिद करज़ई की सत्ता राजधानी काबुल के दायरे से बाहर बढ़ाने के लिए असल वैधता हासिल करने के रूप में देखा जा रहा है. मतदान के दौरान स्याही को लेकर विवाद शुरू हुआ. वोट डालने के बाद मतदाताओं की उंगली पर एक स्याही लगायी जाती है ताकि वह दोबारा वोट न दे सके. मतदान शुरु होते ही कई मतदाताओं ने वोट डालने के बाद उंगली पर लगी स्याही आसानी से मिटाकर दिखायी जिसके बाद विवाद होने लगा. उम्मीदवारों का कहना है कि चुनावी प्रक्रिया में धांधली हो रही है. पहले करीब 15 उम्मीदवारों ने एक सिरे से मतदान के बहिष्कार का निर्णय किया था. करज़ई ने वोट डाला इस बीच अंतरिम राष्ट्रपति हामिद करज़ई ने वोट डालने के बाद कहा कि यह अफगानिस्तान के निवासियों के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण दिन है. राष्ट्रपति करज़ई अत्यंत कड़ी सुरक्षा में वोट डालने गए और जब वह वोट डाल रहे थे तो उनके अमरीकी अंगरक्षक चारों ओर फैले हुए थे. करज़ई के प्रमुख विरोधी अब्दुल सत्तार सीरत ने चुनावों की वैधता पर सवाल उठाए हैं. सीरत ने राष्ट्रपति पद के 14 उम्मीदवारों का पक्ष रखने का दावा किया और कहा कि चुनावी प्रक्रिया वैध नहीं है इसलिए प्रक्रिया को रोक देना चाहिए. सीरत के अलावा युनुस कानूनी और जनरल अब्दुल रशीद दोस्तम ने भी चुनाव स्थगित करने की मांग की है. ये दोनों ही बड़े महत्वपूर्ण उम्मीदवार माने जाते हैं. बीबीसी संवाददाता एंड्रयू नार्थ का कहना है कि अभी ये स्पष्ट नहीं है कि चुनाव अधिकारी बहिष्कार का किस तरह सामना करेंगे. चुनावों की देख रेख कर रहे संयुक्त चुनाव प्रबंधन बोर्ड के प्रमुख फारुक वरदाक ने कहा, " ऐसा लगता है कि वोट डालने के बाद उंगली पर लगाने वाली स्याही लगानें में कुछ समस्याएं आ रही है. स्याही में कोई समस्या नहीं है." जबकि एकमात्र महिला उम्मीदवार डॉक्टर मसूदा जलाल ने कहा, "स्याही को आसानी से मिटाया जा सकता है इसलिए एक ही मतदाता दस बार भी मतदान कर सकता है." देश भर के कई मतदान केंद्रों पर लंबी लाइनें देखी गयी है लेकिन कुछेक स्थानों पर वोट डालने के लिए गलत पेन का इस्तेमाल किए जाने के कारण मतदान थोड़ी देर के लिए रोकना पड़ा. पाकिस्तान में मौजूद लाखों अफ़ग़ान शरणार्थियों ने भी अपने वोट डाले और ऐसी ख़बरें मिलीं कि पहला वोट पेशावर में डाला गया. |
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